
मुंबई/नांदेड। हिंगोली से नागेश पाटिल आष्टीकर द्वारा बागी रुख अपनाने के बाद राजनीतिक हलकों की नजर नांदेड विधान परिषद चुनाव के परिणाम पर टिकी हुई थी। इस चुनाव में उनके पुत्र कृष्णा नागेश पाटिल आष्टीकर महाविकास आघाड़ी की ओर से शिवसेना(यूबीटी) के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे थे। चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ ही घंटों बाद ठाकरे गुट ने कृष्णा आष्टीकर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राऊत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि “पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण कृष्णा नागेश पाटील आष्टीकर को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से निष्कासित किया जाता है।”नांदेड विधान परिषद चुनाव में कृष्णा आष्टीकर को करारी हार का सामना करना पड़ा। उन्हें मात्र 84 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार अमर राजुरकर ने 339 वोट हासिल कर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। राजुरकर को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चौहान का करीबी माना जाता है।
पहले से थी क्रॉस-वोटिंग की आशंका
महाविकास आघाड़ी के भीतर पहले से ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि कृष्णा आष्टीकर अपने पिता की तरह राजनीतिक रणनीति अपनाकर चुनाव में अलग भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस के पास अधिक संख्याबल होने के बावजूद यह सीट ठाकरे गुट को दी गई थी। चुनाव से पहले हिंगोली सांसद नागेश आष्टीकर के Shiv Sena में शामिल होने की चर्चाओं ने महाविकास आघाड़ी के नेताओं और नगरसेवकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी थी। चुनाव प्रचार के दौरान ठाकरे गुट की नेता Sushma Andhare ने कृष्णा आष्टीकर पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि उन्हें महाविकास आघाड़ी का उम्मीदवार मानना “भ्रम” है और वे अपने पिता की तरह ही “चालाक और राजनीतिक रूप से कुशल” हैं। इस बयान को लेकर दोनों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी भी हुई थी। अब चुनाव में करारी हार और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बाद कृष्णा आष्टीकर की पार्टी से निष्कासन की कार्रवाई ने महाराष्ट्र की राजनीति, विशेषकर मराठवाड़ा क्षेत्र में, नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।



