
नाशिक में चतुर्वेद सम्मेलन एवं राष्ट्रीय वेदशास्त्र पुरस्कार समारोह का आयोजन
नाशिक। युवाओं को आधुनिक विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीकों का ज्ञान हासिल करने के साथ-साथ प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से प्रेरणा लेकर नवभारत के निर्माण में योगदान देना चाहिए, यह आह्वान राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने नाशिक में किया। सोमवार को महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान, नाशिक की ओर से चतुर्वेद सम्मेलन तथा राष्ट्रीय वेदशास्त्र पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महापौर हिमगौरी आडके-आहेर, राज्यपाल के सचिव प्रशांत नारनवरे, वेदाचार्य रवींद्र पैठणे, प्रतिष्ठान के संस्थापक ब्रह्मर्षि पंडित शिवकुमार शर्मा, हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के नाशिक परिसर के निदेशक डॉ. नीलाभ तिवारी, धर्मभूषण गौरीशंकर राष्ट्रीय वेदशास्त्र पुरस्कार स्वागत समिति के अध्यक्ष प्रो. जयंत भातांबरेकर और गोखले एजुकेशन सोसायटी की सचिव दीप्ति देशपांडे सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति और जड़ों को समझने के साथ-साथ विश्वस्तरीय शिक्षा भी हासिल करनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराती है। आधुनिक विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय भारत को और अधिक शक्तिशाली बना सकता है। उन्होंने कहा कि महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान समर्पण भावना के साथ वेद परंपरा के संरक्षण और संवर्धन का कार्य कर रहा है। संस्था युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है और आज के तकनीकी युग में इसका विशेष महत्व है। राज्यपाल ने अपेक्षा व्यक्त की कि प्रतिष्ठान को राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ मिलकर भी कार्य करना चाहिए, ताकि प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

