
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। सिविल लाइंस स्थित गणेश मंडपम में संस्कार भारती के तत्वावधान में संगोष्ठी, सम्मान समारोह एवं गीत संध्या का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षक विधायक राज बहादुर सिंह चंदेल ने कहा कि युवा अपनी प्रतिभा को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि उसे परिवार, समाज, प्रकृति और राष्ट्र के हित में आगे बढ़ाएं। संस्कारवान युवा ही विकसित, समरस और सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं। सदर विधायक पंकज गुप्ता ने कहा कि वेद, पुराण और शास्त्रों का ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसे जीवन के आचरण में उतारा जाए। संस्कार भारती के महामंत्री सियाराम पाण्डेय ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी। जिलाध्यक्ष डॉ. प्रभात सिन्हा ने कहा कि संस्कार भारती का नाम ही व्यक्ति को संस्कारों को आत्मसात करने, निरंतर सीखने और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करता है। व्यक्ति की योग्यता से अधिक महत्वपूर्ण उसका समाज के प्रति योगदान है। चंद्रभूषण सिंह ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल गुरु को प्रणाम करने का दिन नहीं, बल्कि उनके दिए ज्ञान को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का अवसर है। सत्य, परिश्रम, अनुशासन और राष्ट्रहित को जीवन का आधार बनाना ही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा है। वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि राम प्रकाश त्रिपाठी ने अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से उपस्थित लोगों को प्रेरित किया, जबकि विशिष्ट वक्ता अनिरुद्ध सौरभ ने आधुनिक परिवेश में गुरु और समाज की स्थिति पर विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मुख्य वक्ता डॉ. ए.के. दीक्षित ने कहा कि लोग गुरुओं से और गुरु समाज से उम्मीद रखते हैं, लेकिन हमें यह भी आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या हम वास्तव में आदर्श शिष्य और आदर्श गुरु की भूमिका निभा पा रहे हैं। संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. मनीष सेंगर ने संस्कार भारती के कार्यों की जानकारी देते हुए कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। इस अवसर पर संस्था के कार्यवाहक अध्यक्ष रामदेव शुक्ल, कोषाध्यक्ष संजीव कुमार निगम, इंदुलता कन्नौजिया, अक्षय शुक्ला, महेंद्र शंकर त्रिपाठी, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. सुरेंद्र मिश्र, शैलेन्द्र त्रिवेदी, संजय राठी, महेश गुप्ता, डॉ. विनय तिवारी, के.के. श्रीवास्तव, पी.के. मिश्र, अखिलेश ओमर, दिवाकर द्विवेदी, शिव बालक राम सरोज, असित अवस्थी, मंजुलता अवस्थी, स्मिता गुप्ता, गीता मिश्रा, धर्मेंद्र शर्मा, दीपेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। साहित्य के क्षेत्र में राम प्रकाश त्रिपाठी को कीर्ति शेष रजनींद्र दीक्षित की स्मृति में रामदेव शुक्ल ने सम्मानित किया। शिक्षा के क्षेत्र में सेवानिवृत्त शिक्षिका सुजाता गुप्ता को आदर्श शिक्षिका के रूप में अनिल कुमार सिन्हा की स्मृति में डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने सम्मानित किया। समाज सेवा के क्षेत्र में डॉ. अतिरेक द्विवेदी को महेंद्र शंकर त्रिपाठी ने, कला के क्षेत्र में रोमा मिश्रा को डॉ. नरेंद्र सेंगर की स्मृति में डॉ. मनिता सेंगर ने तथा संगीत के क्षेत्र में आल्हा गायक राम लखन तिवारी को संगीतकार आनंद पांडेय की स्मृति में सियाराम पाण्डेय ने सम्मानित किया। इसके अलावा ‘संस्कार रत्न’ के रूप में वरिष्ठ रंगकर्मी मो. जब्बार अकरम तथा युवा संगीतकार तन्मय मिश्रा को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के बाद आयोजित गीत संध्या में कानपुर से आए ख्यातिलब्ध गायक सुबोध आर्या ‘वॉयस ऑफ मुकेश’ और किंजल श्रीवास्तव ने मुकेश, किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले के लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुति से महफिल लूट ली। सुबोध आर्या ने ‘सुहानी चांदनी रातें’ गीत प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। इसके बाद किंजल के साथ डुएट में ‘एक प्यार का नगमा है’, ‘मौजों की रवानी’, ‘वफा जिनसे बेवफा हो गए’, ‘चांद सी महबूबा हो मेरी’ सहित कई गीत प्रस्तुत किए गए। अक्षय शुक्ला के शिष्यों में शामिल तनवी मिश्रा ने शास्त्रीय संगीत तथा ‘सादगी तो हमारी जरा देखिए’ की प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया। गायक रोहित तिवारी की प्रस्तुति ने भी शाम को यादगार बनाया। जनपद के व्यवसायी महेश गुप्ता ने ‘दूर कहीं जब दिन ढल जाए’ गीत प्रस्तुत कर अपनी गायन प्रतिभा से परिचित कराया। कार्यक्रम संचालक डॉ. मनीष सेंगर ने ‘ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे’ गीत प्रस्तुत कर माहौल को खुशनुमा बना दिया। कार्यक्रम के समापन पर संस्कार भारती के संरक्षक डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने आयोजन की सफलता के लिए सभी अतिथियों, कलाकारों और सहभागियों को बधाई दी।

