
देवेश प्रताप सिंह राठौर/झांसी, उत्तर प्रदेश। जनसामान्य को सुलभ, त्वरित और पारदर्शी न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी गौरांग राठी द्वारा शुरू की गई ‘न्यायालय आपके द्वार’ मुहिम जनपद में प्रभावी साबित हो रही है। इस अभिनव पहल के माध्यम से वर्षों से न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे लोगों को अब अपने क्षेत्र से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई का लाभ मिल रहा है। गरीब और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है।जिलाधिकारी गौरांग राठी ने ‘‘न्यायालय आपके द्वार’’ कार्यक्रम के अंतर्गत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्टाम्प वाद, आर्म्स एक्ट, राजस्व मामलों तथा उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम से संबंधित कई मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान तीन गुण्डा एक्ट, 17 आर्म्स एक्ट तथा विभिन्न राजस्व एवं स्टाम्प संबंधी मामलों का निस्तारण किया गया।गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 की धारा 3(1) के तहत थाना बरुआसागर, सीपरी बाजार और रक्सा से संबंधित मामलों में सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी ने सुरेन्द्र यादव को एक लाख रुपये के मुचलके पर पाबंद किया तथा छह माह तक प्रत्येक पंद्रह दिन में शनिवार को संबंधित थाने में उपस्थित होने के निर्देश दिए। वहीं आकाश, अजय गुर्जर उर्फ राघवेन्द्र तथा नन्दू उर्फ प्रीतम सिंह को जिला बदर किए जाने का आदेश पारित किया गया।इसके अतिरिक्त थाना गरौठा क्षेत्र के एक आर्म्स एक्ट मामले की भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की गई। वहीं मौजा टांकोरी और मौजा लहरगिर्द से संबंधित दो स्टाम्प वादों की जांच क्षेत्रीय लेखपाल और उप निबंधकों द्वारा मौके पर जाकर की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को स्पॉट मेमो और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।उल्लेखनीय है कि ‘न्यायालय आपके द्वार’ पहल के अंतर्गत वादकारियों को बार-बार जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों पक्ष अपनी बात रखते हैं और आवश्यकतानुसार राजस्व, पुलिस अथवा अन्य विभागीय अधिकारियों को मौके पर भेजकर तत्काल जांच कराई जाती है। इसके आधार पर साक्ष्यों और तथ्यों के अनुरूप निर्णय लिया जाता है। इस व्यवस्था से समय, धन और श्रम तीनों की बचत हो रही है।जिलाधिकारी की इस पहल की सराहना आमजन के साथ-साथ अधिवक्ताओं द्वारा भी की जा रही है। हाल ही में झांसी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अभिनव व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए इसे न्याय को आमजन तक पहुंचाने की प्रभावी पहल बताया था।सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न तहसीलों एवं थानों से अपीलकर्ता, राजस्व अधिकारी, उप निबंधक, लेखपाल, राजस्व निरीक्षक तथा पुलिस अधिकारी जुड़े रहे। वहीं कोर्ट रूम में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) शिव प्रताप शुक्ला, संयुक्त निदेशक अभियोजन अजय कुमार मिश्रा, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर आकाश रंजन, पेशकार सुनील प्रजापति सहित अधिवक्तागण उपस्थित रहे।‘न्यायालय आपके द्वार’ पहल के माध्यम से झांसी प्रशासन न्याय को आमजन के घर तक पहुंचाने की दिशा में एक नई मिसाल कायम कर रहा है, जिससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिल रही है।



