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उन्नाव में रासलीला के सातवें दिन मीराबाई की भक्ति लीला का भावपूर्ण मंचन

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। उन्नाव के ग्राम चहलहा स्थित मां मलहटी देवी मंदिर प्रांगण में चल रही रासलीला के सातवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर श्री बांके बिहारी रासलीला मंडल के कलाकारों द्वारा मीराबाई की भक्ति लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान व्यास राम सहारे शास्त्री ने “लगन मोहे लागी तेरे नाम की” और “राधिका गोरी से ब्रज की छोरी से मैया कराई दे मेरा ब्याह” जैसे भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु झूम उठे और वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो गया। वृंदावन से आए कलाकारों ने लीला के माध्यम से दिखाया कि राजघराने में जन्मी मीराबाई के हृदय में बचपन से ही भगवान श्री कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम बस गया था। बाल्यकाल की एक घटना में, जब मीरा ने अपनी माता से अपने दूल्हे के बारे में पूछा, तो उन्होंने श्री कृष्ण की मूर्ति की ओर संकेत किया। यही भावना मीरा के जीवन का आधार बन गई। लीला में आगे दर्शाया गया कि मीराबाई का विवाह सिसोदिया राजघराने में राणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ, लेकिन विवाह के बाद भी उनका समर्पण केवल भगवान कृष्ण के प्रति ही बना रहा। पति के निधन के बाद भी उन्होंने सांसारिक बंधनों को त्यागकर भक्ति मार्ग को अपनाया। मंचन में यह भी दिखाया गया कि मीराबाई को उनके ससुराल पक्ष द्वारा कई बार प्रताड़ित करने और समाप्त करने की कोशिशें की गईं, लेकिन वे हर बार ईश्वर की कृपा से सुरक्षित रहीं। अंततः उन्होंने सांसारिक वैभव को त्यागकर वैराग्य का मार्ग चुना और द्वारिका में भगवान द्वारकाधीश में लीन होकर परम धाम को प्राप्त हुईं। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने पूरी तल्लीनता के साथ इस भक्ति लीला का आनंद लिया।

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