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एमडीआरए–इंडिया टुडे रैंकिंग 2026 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का शानदार प्रदर्शन, कई संस्थानों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

झांसी, उत्तर प्रदेश। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए प्रतिष्ठित एमडीआरए–इंडिया टुडे रैंकिंग 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों और विभागों ने शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार, अधोसंरचना, छात्र विकास, रोजगारपरक शिक्षा और संस्थागत उत्कृष्टता के आधार पर देशभर में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के कुलपति सम्मेलन कक्ष में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभागों, संस्थानों, निदेशकों और विभागाध्यक्षों को सम्मानित किया। समारोह में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। एमडीआरए–इंडिया टुडे रैंकिंग 2026 देश के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक सर्वेक्षणों में शामिल है। इस वर्ष लगभग 50 हजार संस्थानों का सर्वेक्षण किया गया तथा विभिन्न विषयों में 3,000 से अधिक महाविद्यालयों को राष्ट्रीय रैंकिंग प्रदान की गई। संस्थानों का मूल्यांकन शैक्षणिक गुणवत्ता, फैकल्टी प्रोफाइल, अनुसंधान एवं नवाचार, अधोसंरचना, छात्र विविधता, प्लेसमेंट, उद्योग सहभागिता, नेतृत्व विकास और संस्थागत प्रतिष्ठा जैसे प्रमुख मानकों पर किया गया। रैंकिंग में डॉ. बी.आर.ए. इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) ने राष्ट्रीय स्तर पर 41वीं, भास्कर इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म ने 42वीं, इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर एंड टाउन प्लानिंग ने 47वीं, इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड होटल मैनेजमेंट (आईटीएचएम) ने 65वीं, बाबू जगजीवन राम इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ ने 75वीं, इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंस ने 103वीं, इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ ने 119वीं तथा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने 128वीं रैंक प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा कि यह उपलब्धि केवल रैंकिंग नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की गुणवत्ता, शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान संस्कृति और सामूहिक समर्पण का राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग आज संस्थानों की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण पैमाना बन चुकी हैं और ऐसे समय में विश्वविद्यालय के विभिन्न संस्थानों का उत्कृष्ट प्रदर्शन गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान, डिजिटल अधिगम, नवाचार, कौशल विकास, उद्योग-संस्थान सहयोग और छात्र-केंद्रित शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रगति की है। NAAC A++ मान्यता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन विश्वविद्यालय की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और ज्ञान आधारित विकास का एक सशक्त केंद्र है। नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, शोध संस्कृति, स्टार्टअप और इनोवेशन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय निरंतर कार्य कर रहा है। आईक्यूएसी निदेशक प्रो. एस.के. कबिया ने कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली, डेटा प्रबंधन, संस्थागत समन्वय और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने रैंकिंग प्रक्रिया में सहयोग देने वाले सभी विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, अधिकारियों, तकनीकी टीम और शोधार्थियों को बधाई दी। कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी विभागों के समन्वित प्रयास, प्रशासनिक पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण कार्य संस्कृति ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक शैक्षणिक अधोसंरचना, अनुसंधान सुविधाओं, प्रयोगशालाओं और छात्र हित से जुड़ी व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण और शोध का वातावरण उपलब्ध हो रहा है। इस अवसर पर प्रो. सी.बी. सिंह, प्रो. अर्चना वर्मा, प्रो. आलोक वर्मा, प्रो. एस.पी. सिंह, डॉ. शंभूनाथ सिंह, डॉ. शिल्पा मिश्रा, डॉ. लवकुश द्विवेदी, डॉ. अनुपम व्यास, डॉ. अमरजोत वर्मा, डॉ. जाकिर अली, डॉ. ज्योति कुमारी मिश्रा, डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. अतुल खरे, डॉ. बबीता सिंह, डॉ. नेहा मिश्रा, अनिल बोहरे, हेमंत चंद्रा, हितिका यादव, शशांक चंद्रा, चंद्रभान प्रजापति और राजीव दुबे सहित विभिन्न संस्थानों के शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि को संपूर्ण विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयास, समर्पण और उत्कृष्ट कार्य संस्कृति का परिणाम बताते हुए भविष्य में भी राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान स्थापित करने के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का संकल्प दोहराया।

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