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भिवंडी इमारत हादसा: बचे लोगों का आरोप- तीन कॉलम एक साथ काटने से ढहा कोहिनूर अपार्टमेंट, जांच तेज

भिवंडी। भिवंडी के गंगारामवाड़ी स्थित कोहिनूर अपार्टमेंट के आंशिक रूप से ढहने के बाद बचे हुए निवासियों ने हादसे के भयावह पल याद करते हुए मरम्मत कार्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इमारत के तीनों लोड-बेयरिंग (स्ट्रक्चरल) कॉलम की एक साथ मरम्मत और कटाई किए जाने से पूरी इमारत कमजोर हो गई, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ। निवासियों का कहना है कि इंजीनियरिंग के बुनियादी सुरक्षा मानकों के अनुसार कॉलम की मरम्मत एक-एक करके की जानी चाहिए थी, लेकिन तीनों कॉलम पर एक साथ काम शुरू कर दिया गया, जिससे भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई।
“सपनों का घर पलभर में मलबे में बदल गया”
ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाली कोमल अरविंद गुप्ता ने बताया कि उनके परिवार ने वर्षों की मेहनत और बचत के बाद करीब पांच वर्ष पहले यह फ्लैट खरीदा था। उन्होंने कहा, “मेरे पिता ने दिन-रात मेहनत करके यह घर खरीदा था, लेकिन आज सब कुछ मलबे में बदल गया।” कोमल के अनुसार, मरम्मत के दौरान मजदूर तीनों स्ट्रक्चरल कॉलम पर एक साथ काम कर रहे थे और उनके नीचे बांस का सहारा लगाया जा रहा था। उसी दौरान अचानक इमारत धंसने लगी। उन्होंने बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ फ्लैट में थीं। जान बचाने के लिए बाहर भागते समय रास्ते में नाले का पानी भर जाने से वह फंस गईं। उनकी मां ने काफी प्रयास के बाद उन्हें बाहर निकाला। कुछ समय तक वह मलबे में दबी रहीं और लगातार अपने माता-पिता को आवाज देती रहीं, लेकिन अफरातफरी के बीच कोई किसी की आवाज नहीं सुन पा रहा था। आखिरकार वह मलबे से निकलकर सुरक्षित बाहर आने में सफल रहीं।
चौथी मंजिल से पानी के पाइप के सहारे बचाई जान
चौथी मंजिल के निवासी कृष्णा निषाद ने भी हादसे के लिए तीनों कॉलम की एक साथ मरम्मत को जिम्मेदार बताया। उन्होंने बताया कि हादसे के समय वह अपने भाई और दो अन्य लोगों के साथ फ्लैट में थे। जैसे ही इमारत हिलने लगी, उन्हें सीढ़ियों से नीचे उतरने का मौका नहीं मिला। ऐसे में उन्होंने पानी का पाइप बांधकर नीचे लटकाया और सबसे पहले अपने भाई को उतारा। इसके बाद बाकी तीनों लोग भी उसी पाइप के सहारे सुरक्षित नीचे उतर गए। उन्होंने कहा, “अगर कुछ सेकंड भी देर हो जाती तो शायद हम जिंदा नहीं बचते।”
नाले के पानी से होकर निकला दंपति
तीसरी मंजिल पर रहने वाले मेहताब ने बताया कि हादसे से कुछ क्षण पहले वह किसी काम से नीचे गए थे। लौटते समय उन्होंने तेज धमाके की आवाज सुनी और देखा कि इमारत का हिस्सा गिरने लगा है। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ तुरंत सीढ़ियों से नीचे उतरने का प्रयास किया, लेकिन ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह नाले के पानी से भरा हुआ था। कोई दूसरा रास्ता न होने के कारण दोनों गंदे पानी से होकर इमारत के दूसरी ओर निकले और अपनी जान बचाई।
मरम्मत कार्य पर उठे गंभीर सवाल
हादसे से बचे कई निवासियों का आरोप है कि मरम्मत का कार्य तकनीकी मानकों और संरचनात्मक सुरक्षा नियमों का पालन किए बिना किया जा रहा था। उनका कहना है कि इंजीनियरिंग प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि मरम्मत कार्य निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया गया था या नहीं तथा किसी प्रकार की लापरवाही इस हादसे की वजह बनी।

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