
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह संशोधन कानून बन गया है। नए कानून का उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों में त्वरित जांच, शीघ्र सुनवाई और कड़ी सजा सुनिश्चित करना है। शुक्रवार को जारी राजपत्र (गजट) अधिसूचना में कानून मंत्रालय ने राष्ट्रपति की मंजूरी की जानकारी दी। एंटी-पेपर लीक कानून में संशोधन संबंधी यह विधेयक इसी सप्ताह संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। नए कानून के तहत अब पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। वहीं चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निस्तारण करने का लक्ष्य रखा गया है।
हर राज्य में बनेंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट
संशोधित कानून के अनुसार सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिकार दिया गया है कि वे ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए किसी भी सत्र न्यायालय को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट घोषित कर सकें। इन अदालतों में मामलों की प्रतिदिन सुनवाई होगी, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।
जांच के लिए बनेगी स्पेशल टास्क फोर्स
केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ने पर पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े गंभीर मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार भी दिया गया है। इसके अलावा राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश इन मामलों की पैरवी के लिए एक या अधिक विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकेंगे।
हाईकोर्ट में अपील का विशेष प्रावधान
कानून के तहत किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ संबंधित उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की खंडपीठ में अपील की जा सकेगी। ऐसी अपील स्वीकार होने के बाद उसका निस्तारण भी तीन महीने के भीतर करने का प्रावधान किया गया है।
दोषियों को कड़ी सजा
नए कानून के अनुसार प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने या ऐसी साजिश में शामिल पाए जाने पर कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है, तो दोषियों को कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह कानून देशभर में प्रतियोगी एवं सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने, प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने तथा परीक्षार्थियों का विश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

