
मुंबई। महाराष्ट्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने गुरुवार को कहा कि क्षयरोग (टीबी) उन्मूलन के लिए सरकार के प्रयासों को समाज के सभी वर्गों का सहयोग मिलना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनभागीदारी के माध्यम से 2030 से पहले टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकता है। राज्यमंत्री साकोरे-बोर्डीकर ने कहा कि केंद्र या राज्य सरकार अकेले सामाजिक परिवर्तन नहीं ला सकती। इसके लिए नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों के सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘निक्षय मित्र’ अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं निक्षय मित्र बने हैं और कई जनप्रतिनिधियों तथा नागरिकों ने भी इस अभियान से जुड़कर टीबी मरीजों को दवाइयों के साथ पौष्टिक एवं प्रोटीनयुक्त आहार उपलब्ध कराने में योगदान दिया है।
मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने बताया कि महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है, जहां सरकारी अस्पतालों में रजोनिवृत्ति (Menopause) और पीसीओडी (PCOD) के लिए अलग क्लीनिक शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पीसीओडी के कारण किशोरियों को शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसलिए इस दिशा में विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 2030 तक थैलेसीमिया मुक्त महाराष्ट्र बनाने का लक्ष्य भी तय किया है। बच्चों में बढ़ते मोटापे की समस्या से निपटने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें यूनिसेफ और रोटरी क्लब जैसी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। राज्यमंत्री ने समाज के अधिक से अधिक लोगों और संस्थाओं से स्वास्थ्य संबंधी अभियानों में समय, संसाधन और आर्थिक सहयोग देकर सरकार के भागीदार बनने का आह्वान किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर, राज्य टीबी अधिकारी डॉ. राधाकृष्ण पवार, पाथ (PATH) की निदेशक डॉ. आशा हेगड़े, उप निदेशक डॉ. दीपक बालसुब्रमण्यम तथा विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियों के प्रतिनिधियों ने टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर प्रस्तुति दी।

