Monday, April 13, 2026
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फसल हो या कृषि सम्पदा, बीमा सुरक्षा हमारा वादा: जिलाधिकारी मृदुल चौधरी

झांसी, उत्तर प्रदेश। झांसी में बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की फसलों को हो रहे संभावित नुकसान को देखते हुए जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित बीमा कंपनियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “फसल हो या कृषि सम्पदा, बीमा सुरक्षा हमारा वादा” है और प्रशासन किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जिलाधिकारी ने बताया कि वर्षा, तापमान, हवा, आर्द्रता, ओलावृष्टि, तूफान और बेमौसम बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं से यदि किसी भी अधिसूचित फसल को नुकसान होता है, तो किसानों को बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बीमा कंपनियों को निर्देश दिए कि वे पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक किसानों को योजना से लाभान्वित करें। उन्होंने किसानों को जागरूक करते हुए बताया कि इस योजना का उद्देश्य केवल नुकसान की भरपाई करना नहीं, बल्कि किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और आधुनिक खेती पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना भी है, ताकि उनकी आय स्थिर बनी रहे। योजना के तहत अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी किसान—चाहे ऋणी हों या गैर-ऋणी—पात्र हैं। ऋणी किसानों को यदि योजना से बाहर रहना है, तो उन्हें अंतिम तिथि से 7 दिन पहले संबंधित बैंक में आवेदन देना होगा। बीमा योजना में ग्राम पंचायत स्तर पर असफल बुवाई, फसल अवधि के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान और उपज में कमी को शामिल किया गया है। वहीं व्यक्तिगत स्तर पर ओलावृष्टि, जलभराव, भू-स्खलन, बादल फटना और आकाशीय बिजली से आग जैसी घटनाओं से फसल को हुए नुकसान को भी कवर किया जाता है। इसके अलावा फसल कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सुखाई के दौरान होने वाली क्षति भी योजना के दायरे में आती है। जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी फसल क्षति की स्थिति में किसानों को 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। इसके लिए टोल फ्री नंबर 14447, संबंधित बैंक शाखा, कृषि एवं उद्यान विभाग कार्यालय या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के माध्यम से जानकारी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित प्रीमियम के अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों और बीमा कंपनियों को निर्देशित किया कि आपदा की स्थिति में त्वरित सर्वेक्षण कर प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी किसान को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

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