
कार्यकारी अभियंता नितीन डोंगरे की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल?
मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए गए 100 डेज़ कार्यक्रम में कार्यालयों के कायाकल्प, साफ-सफाई, अधिकारियों की उपलब्धता, सूचना बोर्ड तथा अधिकारियों के नेम प्लेट प्रदर्शित करने जैसे बिंदुओं को विशेष महत्व दिया गया था। इसके बावजूद म्हाडा के मुंबई स्लम बोर्ड के पूर्व विभाग में इन निर्देशों की अनदेखी होती दिखाई दे रही है। मिली जानकारी के अनुसार स्लम बोर्ड के पूर्व विभाग के कार्यकारी अभियंता नितीन डोंगरे के कार्यालय में न केवल स्वयं उनका नेम प्लेट नहीं लगा है, बल्कि उनके अधीन कार्यरत उप अभियंताओं और अन्य अभियंताओं के नेम प्लेट भी गायब है। इतना ही नहीं, कार्यालय में विभाग से संबंधित सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिससे आम नागरिकों को संबंधित अधिकारी की जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई होती है। कार्यालय आने वाले लोगों का कहना है कि कार्यकारी अभियंता के केबिन में प्रवेश के लिए ऑटोमैटिक फिंगर (बायोमेट्रिक) एक्सेस सिस्टम वाला दरवाजा लगाया गया है। जिससे आम नागरिकों की अधिकारियों तक पहुंच बेहद सीमित है, जबकि ठेकेदारों की आवाजाही और बैठकों को प्राथमिकता दी जाती है। इससे कार्यालय की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि मुंबई स्लम बोर्ड के शहर विभाग तथा पश्चिम विभाग के कार्यालयों में अभियंताओं के नेम प्लेट और सूचना बोर्ड निर्धारित स्थानों पर लगे हुए हैं, जबकि पूर्व विभाग में इन बुनियादी व्यवस्थाओं का अभाव दिखाई देता है। मुंबई स्लम बोर्ड के मुख्य अधिकारी सतीश भारतीय प्रशासनिक कार्यों को लेकर सख्त अधिकारी माने जाते हैं। इसके बावजूद यदि उनके अधीन कार्यालयों में शासन के मूलभूत निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह विभागीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों को समय-समय पर अपने अधीनस्थ कार्यालयों का औचक निरीक्षण करना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि कार्यालयों में शासन के निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं, आम नागरिकों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध है या नहीं तथा अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन किस प्रकार कर रहे हैं। लोगों का यह भी कहना है कि निरीक्षण के दौरान यह देखा जाना चाहिए कि अधिकारियों के केबिन में कौन बैठता है और कार्यालय की कार्यप्रणाली शासन की पारदर्शिता संबंधी अपेक्षाओं के अनुरूप है या नहीं।

