
मुंबई। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के उरण तालुका स्थित करंजा मत्स्य बंदर के विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने और आधुनिक मशीनरी का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना के शेष कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाएं, ताकि मछुआरों को जल्द से जल्द आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिल सके।मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित व्यय अग्रक्रम समिति की बैठक में करंजा मत्स्य बंदर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान मत्स्य व्यवसाय विभाग के सचिव रामास्वामी एन. ने परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। बैठक में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्रा, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव ओ.पी. गुप्ता, गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा म्हैसकर, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, वित्त (व्यय) विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास चंद्र रस्तोगी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने बताया कि 5.23 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे करंजा मत्स्य बंदर की क्षमता प्रतिवर्ष 4,500 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन संभालने की होगी। इस परियोजना से करीब 6,600 मछुआरों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मत्स्य व्यवसाय को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण के लिए 149 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की 50-50 प्रतिशत भागीदारी है। अब तक परियोजना के लिए 136.39 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसमें राज्य सरकार की ओर से 74.90 करोड़ रुपये, जबकि केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से 14 करोड़ रुपये तथा केंद्रीय नौवहन मंत्रालय से 60.90 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। परियोजना के तहत स्वीकृत 24 कार्यों में से अब तक 13 कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इनमें अतिरिक्त क्वे वॉल, प्रवेश जलमार्ग का चौड़ीकरण, नावों की पार्किंग सुविधा, कंक्रीट सतह, चार आधुनिक मछली नीलामी हॉल, मत्स्य प्रशासन कार्यालय, फिशिंग गियर शेड, जाल मरम्मत शेड, मछुआरा विश्राम गृह, रेस्टोरेंट, रेडियो संचार केंद्र, गार्ड हाउस, कंपाउंड वॉल और बंदरगाह के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य शामिल हैं। बैठक में बताया गया कि परियोजना के दूसरे चरण के लिए 151.29 करोड़ रुपये का प्रस्ताव महाराष्ट्र मत्स्य व्यवसाय विकास महामंडल (एमएफडीसी) के माध्यम से सरकार को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव में आवश्यक संशोधन कर उसे शीघ्र पुनः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। दूसरे चरण में 370 रनिंग मीटर अतिरिक्त क्वे वॉल, प्रवेश जलमार्ग का और विस्तार, अतिरिक्त बोट पार्किंग, चार आधुनिक मछली नीलामी हॉल, मत्स्य प्रशासन कार्यालय, दो फिशिंग गियर शेड, दो जाल मरम्मत शेड, मछुआरा विश्राम गृह, रेस्टोरेंट, रेडियो कम्युनिकेशन स्टेशन, गार्ड हाउस तथा कंपाउंड वॉल का निर्माण किया जाएगा। साथ ही पूरे बंदरगाह क्षेत्र में कंक्रीट सतह विकसित की जाएगी, जिससे माल ढुलाई और आवागमन अधिक सुगम हो सकेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि परियोजना पूर्ण होने के बाद करंजा मत्स्य बंदर की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मछुआरों को सुरक्षित एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जबकि मछली की नीलामी, भंडारण और परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी। इससे मत्स्य व्यवसाय को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।व्यवस्था और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।

