मुंबई। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘महालक्ष्मी सरस 2026’ प्रदर्शनी को नागरिकों का जबरदस्त प्रतिसाद मिल रहा है। 2 मई से शुरू हुई इस प्रदर्शनी में महिला बचत समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की रिकॉर्ड बिक्री हो रही है। यह जानकारी महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निलेश सागर और परिचालन अधिकारी निखिलकुमार ओसवाल ने दी। 535 उत्पादक स्टॉल और 80 फूड स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र ग्राम विकास एवं पंचायत राज विभाग तथा ‘उमेद-महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान’ के माध्यम से आयोजित राज्यस्तरीय महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी का आयोजन एमएमआरडीए मैदान, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में किया गया है। इस वर्ष प्रदर्शनी में 535 उत्पादक स्टॉल और 80 खाद्य पदार्थ स्टॉल लगाए गए हैं। उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और नवाचार को ध्यान में रखते हुए प्रतिभागियों का चयन किया गया है। नवोदित महिला उद्यमियों को भी बड़ी संख्या में अवसर दिए गए हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए बस सेवा, होम डिलीवरी और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। 40 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले नागपुर में आयोजित प्रदर्शनी में 16 करोड़ रुपये और वाशी में 22 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। मुंबई में आयोजित महालक्ष्मी सरस 2026 में पहले ही सप्ताह में 15 करोड़ रुपये का व्यवसाय दर्ज किया गया है और इस बार कुल कारोबार 40 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। राज्य में 71 लाख महिलाएं जुड़ीं ‘उमेद’ अभियान से मुख्य कार्यकारी अधिकारी निलेश सागर ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। वर्ष 2018 से इस अभियान का महाराष्ट्रभर में विस्तार किया गया। राज्य में अब तक 6 लाख 68 हजार महिला बचत समूह बनाए जा चुके हैं, जिनमें 71 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 55 प्रतिशत आर्थिक सशक्तिकरण लाने में यह अभियान सफल रहा है। अभियान में एकल महिलाओं, ट्रांसजेंडर, दिव्यांग और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिलाओं को डेढ़ लाख रुपये तक आर्थिक सहायता परिचालन अधिकारी निखिलकुमार ओसवाल ने बताया कि महिलाओं को व्यवसाय के लिए ‘कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड’ के माध्यम से पूंजी उपलब्ध कराई जाती है। पहले यह सहायता 60 हजार रुपये तक सीमित थी, जिसे अब बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये तक कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बिना जमीन या सोना गिरवी रखे कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। केवल बचत समूहों को ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत महिलाओं को भी उनकी जरूरतों के अनुसार आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारी और ऊंची ब्याज दरों पर होने वाले अवैध कर्ज प्रचलन पर काफी हद तक रोक लगी है। ‘उमेद मार्ट’ से वैश्विक बाजार तक पहुंच रहे महिला उत्पाद ‘उमेद’ अभियान के तहत शुरू किए गए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उमेद मार्ट के माध्यम से महिला बचत समूहों के उत्पाद अब वैश्विक बाजार तक पहुंच रहे हैं। पिछले दो वर्षों में इस प्लेटफॉर्म पर 4200 से अधिक उत्पाद पंजीकृत किए गए हैं, जबकि इस वर्ष 1000 नए उत्पाद जोड़े गए हैं। महिलाओं को डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अभियान का लक्ष्य एक लाख ‘लखपति दीदी’ तैयार करना है और इस संख्या को आगे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।