
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने चलती ट्रेनों पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है।रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे संपत्ति की रक्षा के लिए कई स्तरों पर अभियान चला रहा है। संवेदनशील और चिन्हित क्षेत्रों में शराबियों, असामाजिक एवं शरारती तत्वों के खिलाफ नियमित अभियान चलाकर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है और कानूनी कार्रवाई की जाती है।उन्होंने कहा कि ट्रेनों में तैनात सुरक्षा कर्मियों को ऐसे संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जहां पथराव की घटनाएं अधिक होती हैं। इसके अलावा रेलवे द्वारा “ऑपरेशन साथी” सहित विभिन्न जन-जागरूकता अभियान चलाकर रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले लोगों को पत्थरबाजी के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।रेलवे ने चलती ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। प्रत्येक घटना का विश्लेषण कर उसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई की जाती है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) लगातार जीआरपी और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय बनाए रखता है तथा महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है, ताकि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।रेल मंत्री ने बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संबंधित पुलिस महानिदेशक या पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में स्टेट लेवल सिक्योरिटी कमेटी ऑफ रेलवे (SLSCR) का गठन किया गया है, जो रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करती है।उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से रेलवे ट्रैक के किनारे बड़े पैमाने पर सुरक्षा फेंसिंग भी की जा रही है। अब तक देशभर में लगभग 19,700 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर फेंसिंग लगाई जा चुकी है, जिसमें बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई रेलखंड शामिल हैं। इसके साथ ही पैदल यात्रियों, मवेशियों और छोटे वाहनों के सुरक्षित आवागमन के लिए रेलवे द्वारा पैदल अंडरपास (Pedestrian Subways) भी विकसित किए जा रहे हैं।

