
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। जिला अस्पताल उमा शंकर दीक्षित की इमरजेंसी के बाहर रविवार को इलाज में कथित लापरवाही से नाराज एक मरीज शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गया। मरीज का आरोप था कि रेफर होकर आने के बावजूद उसे पूरी रात समुचित उपचार नहीं मिला। मामले की जानकारी मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. सुनील कुमार शुक्ला मौके पर पहुंचे, मरीज से बातचीत कर उसकी शिकायत सुनी और उसे दोबारा भर्ती कराकर उपचार शुरू कराया। जानकारी के अनुसार, चंद्रकुमार नामक मरीज को शनिवार रात अचलगंज क्षेत्र के लोहचा से जिला अस्पताल रेफर किया गया था। मरीज का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उसे केवल ग्लूकोज चढ़ाया गया, जबकि पेट में तेज दर्द की लगातार शिकायत के बावजूद किसी चिकित्सक ने उसकी गंभीरता से जांच नहीं की। पूरी रात दर्द से परेशान रहने के बाद उसने विरोध स्वरूप रविवार सुबह जिला अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर अकेले धरना शुरू कर दिया। धरने की सूचना मिलने पर सीएमएस डॉ. सुनील कुमार शुक्ला तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने मरीज से पूरी घटना की जानकारी ली, उसकी शिकायतों को गंभीरता से सुना और तत्काल उसे पुनः भर्ती कर आवश्यक उपचार शुरू कराने के निर्देश दिए। सीएमएस डॉ. सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि मरीज को पेट दर्द की शिकायत थी। प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच में उसके लीवर से संबंधित समस्या सामने आई है। उन्होंने कहा कि मरीज को अस्पताल में भर्ती कर आवश्यक उपचार और चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है तथा उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन चंद्रकुमार ने इलाज में हुई कथित लापरवाही को लेकर अपनी नाराजगी बरकरार रखी है। इस घटना के बाद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और इमरजेंसी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज को हर संभव बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और मामले की भी समीक्षा की जाएगी।



