
मरीजों को सिर्फ अस्पताल की मेडिकल से दवा खरीदने के लिए मजबूर करने का आरोप, कई गंभीर अनियमितताएं उजागर
मुंबई। महाराष्ट्र के अन्न एवं औषध प्रशासन (एफ़डीए) ने नागपुर स्थित न्यू एरा हॉस्पिटल की फार्मेसी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना लाइसेंस रखे गए 20,15,290 रुपए मूल्य के दवा भंडार को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई अस्पताल के मेडिकल स्टोर के संबंध में मिली गोपनीय सूचना के आधार पर 27 जून 2026 को की गई। एफडीए की नागपुर टीम ने टेलीफोन एक्सचेंज चौक, लकड़गंज स्थित न्यू एरा हॉस्पिटल फार्मेसी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान उपलब्ध दवा स्टॉक के सत्यापन में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। पूछताछ में पता चला कि अस्पताल के बेसमेंट में एक कमरे में बिना वैध औषधि बिक्री लाइसेंस के विभिन्न दवाओं का भंडारण बिक्री के उद्देश्य से किया जा रहा था। अस्पताल प्रबंधन संबंधित स्थान का वैध दवा बिक्री लाइसेंस तथा दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद एफडीए ने वहां से दो दवाओं के नमूने जांच के लिए जब्त किए तथा शेष 20.15 लाख रुपए मूल्य का दवा स्टॉक अपने कब्जे में ले लिया। मामले में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियम 1945 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को डॉक्टर द्वारा लिखे गए प्रिस्क्रिप्शन की प्रति नहीं दी जा रही थी। इसके बजाय अस्पताल की कंप्यूटर प्रणाली से सीधे इंडेंट बनाकर अस्पताल की फार्मेसी को भेजा जाता था, जिससे मरीजों को उसी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। एफडीए ने कहा कि यह व्यवस्था आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा 12 जून 2026 को जारी उस आदेश का उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि किसी भी मरीज को अस्पताल के मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में इस संबंध में अनिवार्य सूचना-पट्ट भी प्रदर्शित नहीं मिला। इसके अलावा जांच में कई अन्य गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। इनमें मेडिकल स्टोर के नाम-पट्ट पर केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट का नाम अंकित नहीं होना, एक्सपायरी दवाओं को अलग रखने की उचित व्यवस्था का अभाव, शेड्यूल H-1 दवाओं के स्टॉक एवं बिक्री रिकॉर्ड में अंतर तथा निरीक्षण रजिस्टर (फॉर्म-35) उपलब्ध नहीं होना शामिल है। एफडीए ने अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 के उल्लंघन के संबंध में जवाब मांगा है। जवाब के आधार पर आगे की नियामकीय कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई पर अन्न एवं औषध प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि नागरिकों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित दवाएं उचित कीमत पर उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दवा कहां से खरीदनी है, यह प्रत्येक मरीज का मूलभूत अधिकार (राइट टू चॉइस) है। किसी मरीज को विशेष मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदने के लिए बाध्य करना या डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन देने से इनकार करना कानून का उल्लंघन है। ऐसी किसी भी शिकायत की जानकारी नागरिक अन्न एवं औषध प्रशासन के संबंधित कार्यालय या टोल-फ्री नंबर 1800-222-365 पर दे सकते हैं।



