Friday, June 21, 2024
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मुंबई के समुद्र में बन रहा नया हाजी अली, नहीं तोड़ा तो वहीं बनेगा गणपति मंदिर: राज ठाकरे

मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे एक बार फिर बुधवार (22 मार्च) को गुढी पाडवा के मौके पर आयोजित की गई मुंबई के शिवाजी पार्क की अपनी रैली में शिवसेना की हालिया राजनीति और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर वार किया. हिंदुत्व पर अपनी राय दी और मस्जिदों पर लाउडस्पीकर का मुद्दा फिर उठाया. उन्होंने कहा, ‘शिवसेना के चुनाव चिन्ह धनुषबाण की लड़ाई में तू-तू, मैं-मैं देख कर अफसोस हुआ. हमें जो खत्म हो गई पार्टी कहा करते थे, उनकी आज क्या हालत है देखिए. यह भीड़ देखकर कोई कह सकता है कि मनसे खत्म हो गई पार्टी है?’

हिंदुत्व के मुद्दे पर राज ने कहा, ‘हमें धर्मांध हिंदू नहीं, धर्माभिमानी हिंदू चाहिए.’ उन्होंने जावेद अख्तर का पाकिस्तान में दिए गए इंटरव्यू के क्लिप को दिखाया और कहा कि, ‘ऐसा मुसलमान चाहिए जो पाकिस्तान में जाकर उनके मुंह पर ऐसा जवाब देकर आए. हमारे शहर में जो हमले हुए, वो हम भूले नहीं हैं.’ राज ठाकरे ने सांगली शहर के बारे में बताया कि, ‘वहां बच्चों के खेलने के मैदान में अवैध तरीके से मस्जिद बनाई जा रही है. दो समुदायों में तनाव हुआ है. 15 लोग जख्मी हुए हैं. जो खुराफात करेगा उसे उसी की भाषा में जवाब देना होगा.’

मुंबई के समुद्र में बन रहा नया हाजी अली, नहीं हटाया, तो हम गणेश मंदिर बनाएंगे
राज ठाकरे ने मुंबई में माहीम के पास समुद्र में बन रही एक दरगाह का वीडियो दिखाया और कहा, ‘यहां कुछ दिनों पहले तक कुछ नहीं था. मैंने सेटेलाइट इमेज देखा. कुछ नहीं था. अब अनधिकृत तरीके से यहां नया हाजी अली बनाया जा रहा है. किसकी दरगाह बनाई जा रही है? प्रशासन को कोई खबर नहीं? माहिम पुलिस स्टेशन करीब है. महानगरपालिका के कर्मचारी घूमते रहते हैं. सब सोए हुए हैं. किसी को कुछ पता नहीं. मैं एक महीने का टाइम देता हूं. अगर अनधिकृत दरगाह निर्माण नहीं तोड़ा गया तो ठीक उसके बगल में सबसे बड़ा गणपति मंदिर बनवाऊंगा.’

या तो शिंदे सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाएं, या हम पर छोड़ दें
राज ठाकरे ने कहा कि, ‘कुछ दिनों पहले मैंने मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाने की मुहिम चलाई थी. हमारे कार्यकर्ताओं पर 17 हजार केस हुए. मेरे शिंदे सरकार को कहना है, या तो इस काम को आप अपने हाथ में लें, या यह काम अब हमारे कार्यकर्ताओं पर छोड़ दें. हम जो करें, उस पर ध्यान देना छोड़ दें. यह मुद्दा मैंने छोड़ा नहीं है. जल्दी ही लाउडस्पीकर के मुद्दे पर मैं मुख्यमंत्री शिंदे से मिलने वाला हूं.’

मोदी ने भरी सभा में कहा था- फडणवीस को मिलेगी कुर्सी, तब उद्धव ने क्यों नहीं जताई आपत्ति?
राज ठाकरे ने कहा कि, ‘चार दीवारों के बीच में अमित शाह ने आपको प्रॉमिस किया कि ढाई साल आप सीएम होंगे और ढाई साल फडणवीस. यह किसको पता है? पर यह तो सबको पता है कि भरी सभा में पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि चुनाव के बाद फडणवीस सीएम होंगे, तब आपत्ति क्यों नहीं जताई? इसलिए क्योंकि ऐसा कभी कोई वादा ही नहीं किया गया था. जब उद्धव को एहसास हुआ कि शिवसेना के बिना बीजेपी सरकार नहीं बना सकती, तब मन में उनके सीएम की कुर्सी का लालच पैदा हुआ.’

सीएम शिंदे उद्धव से कंपटीशन ना करें, जनता के काम पूरे करें
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख ने कहा, ‘आज किसान, नौजवान अपनी हालत को लेकर सरकार की तरफ देख रहे हैं. सरकार कोर्ट की तरफ देख रही है. आज विधानसभा का चुनाव हो जाने दो, जो भी हो, एक तय रास्ता तो हो. हमने सुना था महाराष्ट्र कभी सूरत को लूट कर आया था. पहली बार सुना सूरत महाराष्ट्र को लूट रहा है. आज उनको (शिंदे गुट) को ये (उद्धव) चालीस चोर बता रहे हैं. ये चालीस उद्धव से परेशान होकर गए. लेकिन अब गए तो गए. अब आप उनसे कहां कंपटीशन में फंसे हैं. इस प्रतिस्पर्द्धा में जनता के मुद्दे छूट रहे हैं. ये सब छोड़ें, जनता के मुद्दे सुलझाएं. जाइए किसानों से मिलिए. उनकी हालत देखिए. आदित्य की सभा वर्ली में हुई तो आप वर्ली में सभा कर रहे हैं. उद्धव ने खेड में सभा की, अब आप खेड में रैली कर रहे हैं. क्या कर रहे हैं? काम कीजिए. ‘

मुझे शिवसेना छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था
आगे राज ठाकरे ने कहा, ‘जो लोग कहते थे कि राज ठाकरे को शिवसेना प्रमुख बनना था, पार्टी पर अधिकार हासिल करना था, इसलिए वो बाहर गए, झूठ. वे झूठ कहते थे. होर्डिंग्स पर मेरी तस्वीर ना छपे, यह कहा गया था. मुझे लगातार दबाने की कोशिश की जा रही थी. मैंने उद्धव से खुद पूछा था तुम्हें पार्टी प्रमुख बनना है, बन जाओ. तुम्हें आने वाले कल में मुख्यमंत्री बनना है, बन जाना. लेकिन मेरी जिम्मेदारी क्या है, बताओ. मुझे सिर्फ प्रचार के लिए मत बुलाओ. मैंने आकर बालासाहेब ठाकरे को बताया कि हमारी और उद्धव के बीच सारी दूरियां खत्म हो गई हैं. बालासाहेब ने कहा, उद्धव को बुलाओ. गले मिलो. मैंने देखा तो उद्धव बाहर चले गए थे. वे इंतजार में थे कि एक-एक कर सभी पार्टी से चले जाएं.’

ना मैं पार्टी से जाता, ना राणे जाते, उद्धव चाहते थे हम सब चले जाएं
आगे राज ठाकरे ने कहा, ‘नारायण राणे भी पार्टी छोड़ कर नहीं जाते. मैंने बालासाहेब से कहा कि राणे को पार्टी से बाहर ना जाने दिया जाए, बालासाहेब ने कहा, ठीक है बुलाओ.मैंने उन्हें फोन किया कि बालासाहेब बुला रहे हैं. मुझे इस दौरान किसी की बातें सुनाई दे रही थीं. पांच मिनट बाद उनका फोन आया कि राणे को मत बुलाओ. लोगों को पार्टी से निकालने की शुरुआत हो चुकी थी. ऐसी नौबत लाई जा रही थी कि लोग पार्टी छोड़ कर जाएं. मेरे दिमाग में कभी नहीं था कि मुझे नई पार्टी शुरू करनी है. ऐसा कर दिया गया था कि मुझे अपनी पार्टी बनानी पड़ी.’

धनुष-बाण बालासाहेब के सिवा किसी से नहीं उठना था, आगे किसी से उठेगा, यह पता नहीं
मनसे प्रमुख ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह धनुषबाण को उद्धव के हाथों से चुनाव आयोग द्वारा ले लिए जाने पर कहा, ‘मेरे बारे में गलत बातें प्रचारित की जा रही थी. कि मैं महत्वाकांक्षी हूं. उद्धव सिर्फ सहानुभूति पाने के लिए इस तरह की राजनीति करते रहे हैं. आज खुद पार्टी हाथ में लेकर गोबर में मुंह मारे. आज बालासाहेब ठाकरे होते तो ये हालात नहीं होते. मुझे पता था यह धनुष-बाण साधारण नहीं, शिव का धनुष है.यह बालासाहेब ठाकरे के सिवा किसी और (उद्धव) से नहीं उठना था. अब आगे भी किसी (शिंदे) से उठ पाएगा, कह सकता नहीं.’

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