
मुंबई। महाराष्ट्र की विधान परिषद में गुरुवार को मीठी नदी से गाद निकालने के नाम पर हुए भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा खुलासा हुआ। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने परिषद को बताया कि इस मामले में अब तक 65 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है, और जांच की अवधि को साल 2006 तक विस्तारित किया जाएगा। सामंत यह जवाब भाजपा विधायक प्रसाद लाड के प्रश्न पर दे रहे थे, जिसमें मीठी नदी से गाद निकालने के काम में अनियमितताओं की बात उठाई गई थी। इस दौरान अनिल परब (शिवसेना यूबीटी), प्रवीण दरेकर (भाजपा), और भाई जगताप (कांग्रेस) ने भी चर्चा में हिस्सा लिया और घोटाले को लेकर तीखे सवाल किए।
एसआईटी जांच में बड़ा खुलासा:
मंत्री सामंत ने बताया कि इस घोटाले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने वर्ष 2012 से 2021 तक के दौरान तीन लाख से अधिक तस्वीरों की जांच की है। जांच में यह सामने आया है कि कई जगहों पर काम नहीं किया गया या गलत तरीके से दिखाया गया, जिससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “कुछ आरोपी वर्तमान में गिरफ्तार हैं और कुछ ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत में आवेदन किया है। ठेकेदारों की पूरी सूची सरकार के पास है और दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।
गाद हटाने में लापरवाही बनी घोटाले की जड़:
सामंत ने बताया कि यह घोटाला इसलिए बढ़ा क्योंकि हटाई गई गाद को लैंडफिल साइट के बजाय निजी जमीन पर डंप करने की अनुमति दी गई, जिससे निगरानी कमजोर हो गई और फर्जीवाड़े को बढ़ावा मिला। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस घोटाले में कोई भी राजनीतिक व्यक्ति दोषी पाया गया तो उसे भी नहीं बख्शा जाएगा।
जांच 2006 से शुरू होगी:
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि अब इस पूरे मामले की जांच 2006 से शुरू की जाएगी, ताकि प्रारंभिक चरण से ही सभी अनियमितताओं का पर्दाफाश हो सके। यह मीठी नदी शुद्धिकरण परियोजना का वह समय था जब मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) द्वारा गाद निकालने के लिए बड़े ठेके दिए गए थे।




