
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। संस्कार भारती उन्नाव इकाई के तत्वावधान में सिविल लाइंस स्थित गणेश मण्डपम गेस्ट हाउस में श्रमिक दिवस की पूर्व संध्या पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों और विचारकों ने राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें नमन किया। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष डॉ. प्रभात सिन्हा ने कहा कि जिस प्रकार कलाकार अपनी कला से समाज में संस्कारों का निर्माण करता है, उसी तरह श्रमिक अपने परिश्रम से राष्ट्र की भौतिक संरचना गढ़ता है। महामंत्री सियाराम पाण्डेय ने ‘श्रम’ को ‘साधना’ बताते हुए कहा कि हर श्रमिक का कर्म ही उसकी पूजा है। उपाध्यक्ष अनिरुद्ध सौरभ ने भारतीय संस्कृति में विश्वकर्मा पूजा को श्रम के सम्मान का प्रतीक बताया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ कवि दिवाकर द्विवेदी द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। काव्य पाठ के क्रम में दुर्गेश द्विवेदी दुर्लभ, अनुभव अज्ञानी, डॉ. विनय तिवारी, शैलेन्द्र त्रिवेदी और डॉ. प्रभात सिन्हा ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रमिकों के जीवन, संघर्ष और योगदान को मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया।
वरिष्ठ कवियों में शिवबालक राम सरोज, डॉ. के के मिश्रा और सियाराम पाण्डेय ने भी अपनी रचनाओं से श्रमिकों को श्रद्धांजलि दी। जयति प्रभा ने अपने विचारों से कार्यक्रम को नई दिशा दी। कार्यक्रम का संचालन अनिरुद्ध सौरभ ने किया, जिन्होंने अपनी टिप्पणियों से माहौल को जीवंत बनाए रखा। समापन पर डॉ. प्रभात सिन्हा ने सभी कवियों, अतिथियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र शंकर त्रिपाठी, शिशिर अस्थाना, अनिल यादव, इन्दुलेखा कन्नौजिया, अरविंद श्रीवास्तव, डॉ. मनिता सेंगर, संजीव सिंह चौहान, सचिन त्रिपाठी, नीरज सिंह, सुधीर त्रिपाठी और संतोष बॉथम सहित बड़ी संख्या में संस्कार भारती परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।




