
मुंबई। विदर्भ के पांच जिलों में बाघों के हमलों से हुई मौतों के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए व्यापक योजना की घोषणा की है। वन मंत्री गणेश नाइक ने विधानसभा में बताया कि अगले 42 महीनों के भीतर विदर्भ के प्रत्येक जिले में ताडोबा मॉडल पर टाइगर प्रोजेक्ट विकसित किया जाएगा, जबकि कोंकण, पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और खानदेश के हर जिले में तेंदुआ सफारी स्थापित की जाएगी। मंगलवार को विधानसभा में सदस्य अतुल भाटखालकर द्वारा उठाई गई ध्यानाकर्षण सूचना पर जवाब देते हुए मंत्री नाईक ने कहा कि बाघों के हमलों में हुई मौतें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। वन विभाग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग कर लोगों को सतर्क कर रहा है, साथ ही जंगल क्षेत्रों में आवाजाही के समय संबंधी प्रतिबंध और जनजागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में बाघों की संख्या पहले की तुलना में लगभग चार गुना बढ़ गई है, जबकि तेंदुओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बढ़ती वन्यजीव आबादी को देखते हुए उनके लिए अलग और सुरक्षित आवास विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वन मंत्री के अनुसार, नासिक जिले में तेंदुओं के लिए एक विशेष परियोजना विकसित की जा रही है, जिसमें बड़े पैमाने पर बांस रोपण, सुरक्षा घेराबंदी, आंतरिक सड़कें और वन्यजीवों के लिए खाद्य श्रृंखला विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विदर्भ क्षेत्र के लगभग 450 बाघों को विभिन्न टाइगर रिजर्व और व्याघ्र परियोजनाओं में वितरित करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा प्रत्येक जिले में करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में तेंदुआ सफारी विकसित करने का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं में वन्यजीवों के लिए पानी, फलदार वृक्ष और पर्याप्त खाद्य व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे मानव बस्तियों की ओर न आएं। मृतकों के परिजनों को सहायता के विषय में मंत्री नाईक ने कहा कि बाघ या तेंदुए के हमले में मृत्यु होने पर 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसमें से 10 लाख रुपये 24 घंटे के भीतर दिए जाते हैं। साथ ही मृतक के परिवार के पात्र सदस्य को स्थायी नौकरी देने के प्रस्ताव को भी मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के प्रबंधन के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से तेंदुओं की नसबंदी के प्रायोगिक प्रकल्प की अनुमति मांगी है। भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर बाघों के लिए भी इसी प्रकार के उपायों पर विचार किया जा सकता है। वन मंत्री ने कहा कि वन विभाग के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने हेतु बॉन्ड, सीएसआर फंड और अन्य वित्तीय विकल्पों का उपयोग किया जाएगा। राज्य सरकार वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि मुंबई स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क की सीमा दीवार का शेष निर्माण कार्य उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार मानसून के बाद शुरू किया जाएगा तथा अतिरिक्त सुरक्षा के लिए चेन-लिंक फेंसिंग भी लगाई जाएगी।



