
मुंबई। महाराष्ट्र के अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने मरीजों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए मेडिकल स्टोरों को निर्देश दिया है कि डॉक्टर के पर्चे में जितनी दवा लिखी गई है या मरीज को जितनी आवश्यकता है, केवल उतनी ही दवा दी जाए। जरूरत से अधिक दवा खरीदने के लिए मरीजों को मजबूर करने या पूरी स्ट्रिप थमाने पर संबंधित मेडिकल स्टोर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई संभव है।एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि कई मेडिकल स्टोर डॉक्टर द्वारा तीन या पांच गोलियां लिखे जाने के बावजूद मरीज को 10 या 15 गोलियों की पूरी स्ट्रिप खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रथा नियमों के अनुरूप नहीं है और इससे मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। यदि किसी स्ट्रिप में 10 गोलियां हैं और मरीज को केवल पांच गोलियों की आवश्यकता है, तो उसे केवल पांच गोलियां ही उपलब्ध कराई जानी चाहिए।मुंढे ने कहा कि मरीजों को जरूरत से अधिक दवा खरीदने के लिए बाध्य करना स्वीकार्य नहीं है। यदि कोई फार्मासिस्ट या मेडिकल स्टोर संचालक ऐसा करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर उसका लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है। एफडीए के अनुसार, अतिरिक्त दवाएं खरीदने की मजबूरी से मरीजों का खर्च बढ़ता है और बची हुई दवाएं अक्सर घरों में पड़ी-पड़ी एक्सपायर हो जाती हैं, जिससे दवाओं की बर्बादी भी होती है। नए निर्देश का उद्देश्य इस समस्या पर रोक लगाना और मरीजों के हितों की रक्षा करना है।इससे पहले भी एफडीए ने अस्पतालों को निर्देश दिए थे कि वे मरीजों को किसी विशेष मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदने के लिए बाध्य न करें तथा डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन मरीज या उसके परिजनों को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। अब इसी नीति को मेडिकल स्टोरों के स्तर पर भी सख्ती से लागू किया जा रहा है।एफडीए ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई मेडिकल स्टोर निर्धारित मात्रा से अधिक दवा खरीदने के लिए दबाव डालता है या पूरी स्ट्रिप लेने की अनिवार्यता बताता है, तो इसकी शिकायत तुरंत दर्ज कराएं। शिकायत के लिए: टोल फ्री नंबर: 1800-222-365ऑनलाइन पोर्टल: complaints.mahafda.in। एफडीए का कहना है कि प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले को लेकर केमिस्ट संगठनों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ संगठनों ने मरीजों के हित में इस कदम का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने इसे व्यावहारिक चुनौतियों वाला निर्णय बताया है। हालांकि, आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

