
मुंबई। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। बुधवार को प्रताप सरनाईक ने विधान परिषद में जानकारी दी कि महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 के तहत वर्ष 2035 तक महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल (एसटी) की पूरी बस फ्लीट को इलेक्ट्रिक में बदल दिया जाएगा। मंत्री सरनाईक ने बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना समय की आवश्यकता बन गया है। करीब 14 हजार बसों का बेड़ा रखने वाली एसटी सेवा ग्रामीण महाराष्ट्र की जीवनरेखा है, जिसे अब हरित ऊर्जा आधारित बनाया जाएगा।
नागरिकों को भी मिलेगा लाभ
इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर कर में छूट दी जाएगी और टोल माफी के जरिए यात्रा लागत कम होगी। साथ ही राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 25 किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई गई है।चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सौर ऊर्जा पर जोर
सरकार चार्जिंग स्टेशनों के विकास के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देगी और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देगी, ताकि ऊर्जा उत्पादन से लेकर उपयोग तक पूरी प्रक्रिया पर्यावरण के अनुकूल हो सके। इसके अलावा अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आर्थिक और रोजगार पर सकारात्मक असर
सरकार का मानना है कि इस पहल से जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं एसटी महामंडल की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग से ईंधन और रखरखाव खर्च में कमी आएगी, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी। साथ ही ई-मोबिलिटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। मंत्री सरनाईक ने विश्वास जताया कि इस कदम से महाराष्ट्र देश में हरित परिवहन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनेगा।




