
मुंबई। नवी मुंबई महानगरपालिका (एनएमएमसी) क्षेत्र में खड़ी की गई 4,946 अवैध इमारतों के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पालिका प्रशासन को फटकार लगाई है। अदालत ने टिप्पणी की कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण संभव नहीं है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने जनहित याचिका से जुड़ी अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान की। सुनवाई के दौरान एनएमएमसी के अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त संजय शिंदे द्वारा दाखिल हलफनामे में बताया गया कि 23 जुलाई 2025 तक किए गए सर्वेक्षण के अनुसार पालिका क्षेत्र में कुल 12,687 अवैध निर्माण पाए गए हैं। इनमें से 4,946 इमारतें ऐसी हैं जिनके पास न तो प्रारंभ प्रमाणपत्र (सीसी) है और न ही भोगवटा प्रमाणपत्र (ओसी)। इन सभी को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि अदालत ने हलफनामे में गंभीर खामियां बताते हुए कहा कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में ये अवैध निर्माण हुए, उनके नाम जानबूझकर छिपाए गए हैं। साथ ही निर्माण कार्य शुरू होने या पूरा होने के दौरान संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की, इसका भी कोई उल्लेख नहीं किया गया। न्यायालय ने कहा कि हलफनामा महत्वपूर्ण तथ्यों पर मौन है और वास्तविक स्थिति से बचने का प्रयास करता है। खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का समय आ गया है और उन्हें निलंबित किए बिना ऐसे मामलों पर अंकुश लगाना संभव नहीं होगा। अदालत ने पालिका आयुक्त को निर्देश दिया कि अवैध निर्माण रोकने में विफल रहने वाले सभी अधिकारियों और विभाग प्रमुखों के नाम हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत किए जाएं। साथ ही उनके खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई का भी स्पष्ट विवरण दिया जाए। एनएमएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल अंतुरकर ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई 2026 तक स्थगित कर दी। यह मामला अब न केवल अवैध निर्माणों बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और अधिकारियों की संभावित भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण बन गया है।



