मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा- भाविकों को मिले शुद्ध और मिलावट मुक्त प्रसाद, मंडल लें प्रशिक्षण और मार्गदर्शन

मुंबई। महाराष्ट्र के राज्य उत्सव सार्वजनिक गणेशोत्सव के दौरान गणेश मंडलों द्वारा श्रद्धालुओं को वितरित किए जाने वाले प्रसाद की शुद्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गणेशोत्सव मंडलों से कहा है कि वे प्रसाद के संबंध में खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफ़डीए) के नियमों की जानकारी लें और श्रद्धालुओं को शुद्ध एवं मिलावट मुक्त प्रसाद उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों का पालन करें। इसके लिए मंडलों को आवश्यक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण लेने का भी प्रयास करना चाहिए। गणेशोत्सव-2026 के मद्देनजर कानून-व्यवस्था और तैयारियों को लेकर गुरुवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रशासन और गणेशोत्सव मंडलों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुंबई के गणेशोत्सव मंडलों ने उत्सव को व्यापक स्वरूप दिया है। लोकमान्य तिलक ने गणेशोत्सव के माध्यम से सामाजिक एकता और जनजागरण का जो विचार सामने रखा था, उसे पूरे राज्य में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। गणेशोत्सव को राज्य उत्सव का दर्जा मिलने के बाद इसकी परंपरा के साथ अनुशासन और पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी नागरिकों, प्रशासन, मंडलों और विभिन्न संगठनों की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गणेशोत्सव उत्साहपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन, गणेशोत्सव मंडलों और समन्वय समितियों को आपसी तालमेल से काम करना चाहिए। आयोजन में आने वाली कमियों को दूर करने के साथ मंडलों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। मुंबई और पुणे जैसे शहरों में वर्षों से गणेशोत्सव के लिए व्यवस्थित तंत्र विकसित हुआ है, लेकिन हर साल सामने आने वाली नई समस्याओं की पहचान कर उनका समय रहते समाधान करना भी जरूरी है। फडणवीस ने निर्देश दिए कि गणेश मंडलों की अनुमति से जुड़े मामले लंबित नहीं रखे जाएं। पुराने मंडलों की अधिकांश अनुमतियां नियमित प्रकृति की होने के कारण प्रशासन स्वयं पहल कर उन्हें तेजी से जारी करे। विभिन्न महानगरपालिका क्षेत्रों में गणेश प्रतिमाओं के आगमन और विसर्जन मार्गों को अच्छी स्थिति में रखा जाए। रास्तों पर खड्डे नहीं होने चाहिए और रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका अधिनियम की धारा 143 के तहत ट्रस्ट के नाम पर स्थित कार्यालयों के लिए संपत्ति कर में छूट का प्रावधान है। इसके लिए संबंधित मंडलों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा और इस संबंध में महानगरपालिका आयुक्त द्वारा मंजूरी दिए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी। फटाखों और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस को नजर रखने और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी गणेश प्रतिमाओं वाले मंडल आगमन और विसर्जन से पहले अपनी सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा जांच करें। सरकार की ओर से इसके लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीओपी की प्रतिमाओं के समुद्र अथवा नदी में विसर्जन से प्रदूषण न हो, इसके लिए उचित प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस संबंध में सरकार ने उच्च न्यायालय को भी जानकारी दी है। पिछले वर्ष के निर्णय को उच्च न्यायालय द्वारा कायम रखने से गणेशोत्सव मंडलों की कई परेशानियां कम हुई हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि गणेशोत्सव को शांति, उत्साह, अनुशासन और सौहार्द के वातावरण में संपन्न कराने के लिए शासन, प्रशासन और मंडलों का समन्वय जरूरी है। उन्होंने बताया कि मुंबई में करीब 1,850 किलोमीटर सड़कें कंक्रीट की हो चुकी हैं। महानगरपालिका को विशेष रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि गणेश प्रतिमाओं के आगमन और विसर्जन मार्गों पर खड्डे न रहें। गणेश मंडलों को पांच वर्ष की अनुमति देने की दिशा में भी कार्रवाई की गई है। शिंदे ने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों को लेकर मंडलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बड़ी प्रतिमाओं की आवाजाही से पहले उनकी संरचना, नट-बोल्ट, वेल्डिंग और अन्य जोड़ की सुरक्षा की जांच की जाए। आगमन और विसर्जन के दौरान बच्चों तथा श्रद्धालुओं को बड़ी प्रतिमाओं से सुरक्षित दूरी पर रखा जाए। बैठक में कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार, गृह राज्यमंत्री योगेश कदम, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष सिद्धेश कदम, पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते सहित मंत्रालय, मुंबई महानगरपालिका, जिला परिषद के वरिष्ठ अधिकारी और गणेशोत्सव मंडलों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

