
मुंबई/नवी मुंबई। उलवे में बुधवार को आयोजित भव्य समारोह में जननेता रामशेट ठाकुर के ‘अमृत महोत्सव अभिष्टचिंतन’ कार्यक्रम का आयोजन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर ‘रामशेट ठाकुर पब्लिक स्कूल’ का उद्घाटन और ‘कोनशिला’ (आधारशिला) का अनावरण भी संपन्न हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि संघर्ष, समाजसेवा और जनहित के प्रति समर्पित जीवन मूल्यों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि रामशेट ठाकुर ने यह साबित किया कि एक साधारण परिवार से आने वाला व्यक्ति भी अपने कर्म और संकल्प से समाज में असाधारण परिवर्तन ला सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि रामशेट ठाकुर ने कर्मवीर भाऊराव पाटिल की ‘रयत शिक्षण संस्था’ में ‘कमाओ और सीखो’ योजना के तहत शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बाद में शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया। फडणवीस ने कहा कि ठाकुर ने अपनी जीवन भर की कमाई शिक्षा के क्षेत्र में लगाई ताकि आने वाली पीढ़ियों को वे कठिनाइयाँ न झेलनी पड़ें जिनसे वे स्वयं गुजरे थे। उन्होंने अनेक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराया। मुख्यमंत्री ने रामशेट ठाकुर के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्थानीय लोगों के अधिकारों और रोजगार के लिए कई बड़े आंदोलन किए। ‘माटी के बेटों’ के अधिकारों के लिए स्वर्गीय डी.बी.पाटिल द्वारा चलाए गए आंदोलन में भी रामशेट ठाकुर की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि संसद तक पहुंचने के बाद भी ठाकुर ने सत्ता को नहीं, बल्कि समाजसेवा को प्राथमिकता दी और सक्रिय राजनीति से अलग होकर खुद को पूरी तरह जनकल्याण के कार्यों में समर्पित कर दिया। रायगढ़ और नवी मुंबई के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। इस अवसर पर मंत्री गणेश नाईक, मंत्री आशीष शेलार, मंत्री अदिति तटकरे, मंत्री भरत गोगावले, सांसद सुनील तटकरे, सांसद श्रीरंग बारणे, विधायक रवींद्र चव्हाण, विधायक प्रशांत ठाकुर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।




