Thursday, May 14, 2026
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बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पुलिस स्टेशन में वीडियो बनाना ‘जुर्म’ नहीं, अब नहीं चलेगी खाकी की मनमानी!

इंद्र यादव/मुंबई। क्या पुलिस स्टेशन के अंदर मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग करना अपराध है? इस सवाल पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आम नागरिकों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पुलिस स्टेशन के भीतर वीडियो रिकॉर्डिंग करना अपने आप में ‘आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम’ के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।
वर्धा के नागरिक की याचिका बनी मिसाल
यह मामला वर्धा निवासी Ravindra Sheetalrao Upadhyay से जुड़ा है। उनके खिलाफ सांवगी (मेघे) पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि उन्होंने पुलिस स्टेशन के अंदर वीडियो रिकॉर्डिंग की थी। पुलिस ने उन पर गोपनीयता भंग करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी धाराएं लगाई थीं। मामला अदालत पहुंचने के बाद न्यायमूर्ति मनीष पिटाले और न्यायमूर्ति वाल्मीकि एसए मेनेजेस की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
कोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने कहा कि ‘आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम’ केवल उन स्थानों पर लागू होता है जिन्हें सरकार ने आधिकारिक रूप से ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ घोषित किया हो। पुलिस स्टेशन इस श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस कार्यप्रणाली की रिकॉर्डिंग को जासूसी नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है और नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।एफआईआर रद्द: खंडपीठ ने रवींद्र उपाध्याय के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए कहा कि केवल वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर इस तरह की कठोर कार्रवाई उचित नहीं है।
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा संदेश
इस फैसले को नागरिक अधिकारों और पारदर्शिता के पक्ष में अहम माना जा रहा है। अक्सर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने या पुलिस व्यवहार का वीडियो बनाने पर लोगों को डराया जाता है कि यह गैरकानूनी है। अदालत के इस फैसले के बाद अब आम नागरिकों को कानूनी मजबूती मिली है। अधिवक्ता Rakesh Saroj ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षा देना है, भय पैदा करना नहीं। उन्होंने कहा कि पुलिस स्टेशन कोई सैन्य अड्डा नहीं है जहाँ मोबाइल का इस्तेमाल स्वतः अपराध बन जाए।
ग्राहक पंचायत ने जताई खुशी
इस मामले को सामने लाने में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्था ने इस फैसले को जागरूक नागरिकों की जीत बताया है। हालांकि अदालत ने यह भी संकेत दिया कि रिकॉर्डिंग का उद्देश्य पुलिस कार्य में बाधा डालना, कानून-व्यवस्था बिगाड़ना या हिंसा भड़काना नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति पारदर्शिता या अपनी सुरक्षा के लिए रिकॉर्डिंग करता है, तो उसे अपराध नहीं माना जा सकता।

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