
मुंबई। महाराष्ट्र को कृषि निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के उद्देश्य से आयोजित “एग्री एक्सपोर्ट कॉन्क्लेव 2026” में राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर रणनीति स्पष्ट की। मंगलवार को वानखेड़े स्टेडियम स्थित एमसीए सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन और निर्यात बढ़ाने के लिए एकजुट प्रयास करने का आह्वान किया। मंत्री रावल ने कहा कि महाराष्ट्र देश के अग्रणी कृषि राज्यों में से एक है और देश के कुल कृषि उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी 10 से 12 प्रतिशत है। राज्य से हर वर्ष 100 से अधिक देशों में 20 से 25 हजार करोड़ रुपये का कृषि निर्यात होता है, जो इसकी वैश्विक क्षमता को दर्शाता है। हालांकि, इस क्षेत्र में और अधिक विस्तार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सॉर्टिंग, ग्रेडिंग, आधुनिक पैकेजिंग और तेज सप्लाई चेन के जरिए कृषि उत्पादों का मूल्य बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है। “नाशिक के अंगूर से लेकर महाबलेश्वर की स्ट्रॉबेरी और गडचिरोली से कोल्हापुर तक के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए,” उन्होंने कहा। कार्यक्रम में एपीडा (APEDA) के प्रतिनिधियों ने देश की कृषि निर्यात स्थिति पर प्रस्तुति दी, वहीं महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन मंडल और ‘मैग्नेट’ परियोजना के माध्यम से मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
एशियाई विकास बैंक के सहयोग से चल रही इस परियोजना के जरिए किसान से ग्राहक तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त किया जा रहा है। मंत्री रावल ने कहा कि केवल कर्जमाफी ही नहीं, बल्कि किसानों के उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराना अधिक जरूरी है। बदलती उपभोक्ता मांग के अनुसार स्वच्छ और आकर्षक पैकेजिंग पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में कृषि निर्यात के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई गई है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में राज्य सरकार निर्यात बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। इस कॉन्क्लेव में निर्यातकों, नीति निर्माताओं और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया और कृषि निर्यात को नई दिशा देने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की।




