
1,000 बालिकाओं के खातों में जमा किए गए 20-20 हजार रुपये, अगले 10 वर्षों तक हर साल जमा होगी समान राशि
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और सर्वसमावेशी संस्कृतियों में से एक है। आज आवश्यकता है कि भारतीय संस्कृति और भाषाओं की विशिष्टता को पाश्चात्य विचारधारा से अलग पहचान के साथ विश्व के समक्ष प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाए। भारतीय संस्कृति ने सदैव सभ्य, संस्कारित और समतामूलक समाज व्यवस्था का समर्थन किया है तथा समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेष रूप से बालिकाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोलने की परंपरा विकसित की है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री फडणवीस घाटकोपर स्थित एसपीआरजे कन्या विद्यालय में आयोजित ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के अंतर्गत बालिकाओं के आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विधायक प्रसाद लाड, विधायक राम कदम, गौरव भंडारी, विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद, बैंकों के प्रतिनिधि, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।
बालिकाओं की शिक्षा ने बदली समाज की तस्वीर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि पिछले सौ वर्षों में हजारों-लाखों बालिकाओं ने ऐसे शैक्षणिक संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। यदि ऐसे प्रेरणादायी सामाजिक प्रयास नहीं किए गए होते तो अनेक बालिकाएं शिक्षा से वंचित रह जातीं। उन्होंने कार्यक्रम में बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत संस्कारपूर्ण स्तोत्र को भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ परंपरा का प्रतीक बताया। भारतीय और पाश्चात्य विचारधारा के बीच अंतर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां पाश्चात्य विचारधारा प्रतिस्पर्धा और शक्ति को महत्व देती है, वहीं भारतीय संस्कृति प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से जीवन और प्रगति का अधिकार देती है। समाज के सक्षम वर्ग द्वारा कमजोर और वंचित लोगों के लिए अवसर एवं सहयोग उपलब्ध कराना भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है।
महिलाओं को समान अवसर देने वाले देश विकास में आगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के माध्यम से महिला शिक्षा और सशक्तिकरण को राष्ट्रीय जन आंदोलन का स्वरूप दिया। विश्व के जिन देशों ने महिलाओं को शिक्षा, कौशल और समान अवसर दिए, वे विकास के शिखर तक पहुंचे हैं। भारतीय इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि जब-जब महिलाओं को सम्मान और अवसर मिला, देश ने प्रगति की। उन्होंने कहा कि इसी विचार से केंद्र सरकार ने बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। इनमें ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ बालिकाओं की शिक्षा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल है।
1,000 बालिकाओं के खातों में 20-20 हजार रुपये
अभियान के तहत 1,000 बालिकाओं के खातों में प्रत्येक के लिए 20,000 रुपये जमा किए गए हैं। आगामी दस वर्षों तक प्रत्येक खाते में प्रतिवर्ष इतनी ही राशि जमा की जाएगी। इससे बालिकाओं की शिक्षा और भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए दीर्घकालिक वित्तीय आधार तैयार होगा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि समाज में एक समय बालिकाओं को बोझ समझने जैसी गलत मानसिकता विकसित हो गई थी, जिसके कारण कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक बुराइयों ने जन्म लिया। इसके दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतने पड़े। इसलिए बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बने प्रत्येक युवक-युवती को समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्गों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। व्यक्ति अपनी संपत्ति से नहीं, बल्कि अपने अच्छे कार्यों से याद किया जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करना ही वास्तविक समाज सेवा है।
‘सुकन्या समृद्धि’ और ‘एनपीएस वात्सल्य’ में पंजीकरण
ट्रस्ट द्वारा संचालित अभियान के तहत दस वर्ष से कम आयु की बालिकाओं का पंजीकरण ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ में किया गया, जबकि दस वर्ष से अधिक आयु की बालिकाओं को ‘एनपीएस वात्सल्य योजना’ से जोड़ा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा, वित्तीय समावेशन और निरंतर सहयोग के माध्यम से बालिकाओं को सशक्त बनाना वर्तमान समय की आवश्यकता है। इस तरह की पहल प्रत्येक बालिका के लिए आर्थिक रूप से सुरक्षित और समावेशी भविष्य के निर्माण के प्रयासों को मजबूती प्रदान करती है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने गौरव भंडारी की सामाजिक प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि एक व्यक्ति का दृढ़ संकल्प समाज में कितना बड़ा सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है, यह अभियान उसका उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने वंचित बालिकाओं की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा के लिए शुरू की गई पहल की प्रशंसा की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतीकात्मक रूप से ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के अंतर्गत छात्राओं और उनकी माताओं को धनराशि के चेक भी वितरित किए।

