
करीब ₹300 करोड़ की परियोजना, 20 मीटर ऊंची कांस्य प्रतिमा के साथ अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान भी होगा स्थापित
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि लोकशाहीर साहित्यरत्न अन्ना भाऊ साठे का साहित्य, विचार और सामाजिक कार्य केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है। चिराग नगर स्थित उनकी कर्मभूमि पर बनने वाला ‘लोकशाहीर साहित्यरत्न अन्ना भाऊ साठे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान’ और स्मारक केवल एक इमारत नहीं, बल्कि वंचितों, श्रमिकों और उपेक्षित समाज के संघर्ष, स्वाभिमान एवं सामाजिक परिवर्तन का जीवंत प्रतीक बनेगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री फडणवीस चिराग नगर, घाटकोपर में स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण (एसआरए), बृहन्मुंबई द्वारा निर्मित किए जा रहे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान तथा स्मारक के प्रथम चरण के भूमिपूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर, केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले, कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशीष शेलार, सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट, मुंबई की महापौर रितु तावड़े, सांसद संजय दीना पाटिल, विधायक राम कदम, अमित गोरखे, प्रसाद लाड, अमित साटम, अन्ना भाऊ साठे की पुत्रवधू सावित्रीबाई साठे, पोती ज्योति साठे और पोते सचिन साठे, एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. महेंद्र कल्याणकर, उप प्रमुख अभियंता रमा मिटकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
वर्षों से लंबित परियोजना को मिली गति
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि वर्षों से लंबित इस महत्वाकांक्षी स्मारक परियोजना का निर्णय वर्ष 2016 में लिया गया था। राज्य सरकार ने नीतिगत निर्णय लेते हुए परियोजना का निर्माण निजी डेवलपर के बजाय स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण के माध्यम से कराने का फैसला किया, ताकि निर्माण कार्य अधिक पारदर्शी और तेजी से पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्मारक निर्माण के दौरान क्षेत्र के नागरिकों के पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सरकार किसी को बेघर करके विकास करने में विश्वास नहीं रखती। पात्र हो या अपात्र, प्रत्येक नागरिक के लिए उचित आवास की व्यवस्था करने के बाद ही स्मारक का निर्माण आगे बढ़ाया जा रहा है। यही सामाजिक न्याय का वास्तविक स्वरूप है।
27 से अधिक भाषाओं में पहुंचा अन्ना भाऊ साठे का साहित्य
मुख्यमंत्री ने अन्ना भाऊ साठे के साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं का विश्व की 27 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। रूसी, फ्रांसीसी और इतालवी जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के माध्यम से उनके विचार दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में रूस के मॉस्को विश्वविद्यालय में अन्ना भाऊ साठे की प्रतिमा का अनावरण किया गया और वहां के साहित्यकारों ने उनके साहित्य पर चर्चा की, जो पूरे महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है।
जुलाई 2029 तक स्मारक पूरा करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री फडणवीस ने एसआरए एवं संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि परियोजना में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो और जुलाई 2029 तक स्मारक का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा जाए। उन्होंने कहा कि स्मारक का निर्माण पूरा होने के बाद इसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्मारक सामाजिक समता, स्वाभिमान, संघर्ष और परिवर्तन का संदेश देने वाला प्रेरणास्थल बनेगा। मातंग समाज सहित सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पुणे में क्रांतिवीर लहुजी साळवे के स्मारक का करीब 65 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और उसका भी शीघ्र लोकार्पण किया जाएगा।
₹300 करोड़ का प्रावधान, जरूरत पड़ने पर और धनराशि देगी सरकार: एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि लोकशाहीर साहित्यरत्न अन्ना भाऊ साठे ने अपना पूरा जीवन वंचित, शोषित और श्रमिक समाज के न्याय, स्वाभिमान एवं अधिकारों के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि अन्ना भाऊ साठे के विचारों और साहित्य का वैश्विक स्तर पर प्रसार हो, नई पीढ़ी उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा ले तथा सामाजिक परिवर्तन को नई दिशा मिले, इसी उद्देश्य से चिराग नगर में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान तथा भव्य स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। शिंदे ने बताया कि परियोजना के लिए राज्य सरकार ने करीब ₹300 करोड़ का प्रावधान किया है। आवश्यकता पड़ने पर धनराशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक एवं सामाजिक इतिहास के अनुरूप विश्वस्तरीय स्मारक का निर्माण सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने बताया कि परियोजना से प्रभावित पात्र परिवारों का सम्मानपूर्वक पुनर्वास किया जा रहा है। इसके अलावा अन्ना भाऊ साठे के मूल गांव वाटेगांव में भी ₹50 करोड़ की लागत से अलग स्मारक का निर्माण किया जा रहा है।
‘आर्टी’ से मातंग समाज के युवाओं को मिलेगा अवसर: रामदास आठवले
केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि ‘लोकशाहीर अन्ना भाऊ साठे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (ARTI)’ मातंग समाज के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि ‘बार्टी’ की तर्ज पर स्थापित ‘आर्टी’ के माध्यम से शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर युवाओं को सशक्त बनाया जाएगा। उन्होंने मातंग समाज की लंबे समय से लंबित मांग पूरी करने के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक ‘पारदर्शिता से परिवर्तन की ओर’ का विमोचन किया। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाली प्रेरणा कैलास खवले को सम्मानित किया गया। अन्ना भाऊ साठे के परिवारजनों का भी सम्मान किया गया। स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र कल्याणकर ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि सचिव दत्तात्रय नवले ने आभार व्यक्त किया।
अन्ना भाऊ साठे स्मारक की प्रमुख विशेषताएं
परियोजना के तहत परिसर में अन्ना भाऊ साठे की 20 मीटर ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा के साथ प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो की व्यवस्था होगी। चिराग नगर स्थित अन्ना भाऊ साठे के मूल निवास को उनके पैतृक गांव वाटेगांव के घर की तर्ज पर संरक्षित किया जाएगा। परिसर में छह मीटर ऊंची ‘प्रेरणा दीवार’ बनाई जाएगी, जहां उनके जीवन पर आधारित म्यूरल के साथ ध्वनि एवं प्रकाश शो प्रदर्शित किया जाएगा। अत्याधुनिक डिजिटल अनुभव दीर्घा में वर्चुअल टूर, मोम की प्रतिमा, बहुभाषी ऑडियो गाइड और सेल्फी प्वाइंट जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। ‘वॉक विद अन्ना भाऊ’ अवधारणा के तहत वाटेगांव से मुंबई तक की उनकी 255 किलोमीटर की पैदल यात्रा को विशेष प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। अध्ययन एवं प्रशिक्षण केंद्र में पुस्तकालय, प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन केंद्र, कौशल विकास केंद्र और अध्ययन कक्ष की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एम्फीथिएटर, हरित छत (ग्रीन रूफ) तथा करीब 150 वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था विकसित की जाएगी।



