Saturday, July 13, 2024
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महाराष्ट्र में फिर मंडरा रहा सूखे का संकट, होने वाला है एल-नीनो इफेक्ट; मौसम वैज्ञानिकों ने चेताया

Maharashtra : महाराष्ट्र में सूखे का संकट दस्तक दे रहा है. बेमौसम बरसात से त्रस्त महाराष्ट्र के किसान अब अकाल की वजह से मुश्किलों में घिरने वाले हैं. यह अमेरिका के मौसम वैज्ञानिक बता रहे हैं. यह सब एल नीनो के असर से होने जा रहा है. एल नीनो से मानसून पर असर होगा. इसी वजह से सूखे का सामना करना पड़ेगा. यह दावा नैशनल ओशनिक ऐंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन नाम की अमेरिका की मौसम बताने वाली संस्था ने किया है. इस साल अत्यधिक गर्मी का मौसम होगा और उसके बाद सूखे का संकट भीषण होगा.

महाराष्ट्र में इस बार सूखा या अकाल की सबसे बड़ी वजह एल नीनो इफेक्ट को बताया जा रहा है. अमेरिकी मौसम वैज्ञानिकों के इस अनुमान को भारतीय मौसम विभाग की ओर से फिलहाल नकारा नहीं गया है और ना ही इस पर हामी भरी गई है.

जून से दिसंबर तक 55 से 60 फीसदी पड़ेगा एल नीनो का असर
अमेरिकी मौसम के जानकारों के मुताबिक जून से दिसंबर के बीच 55 से 60 फीसदी तक एल नीनो के प्रभाव की संभावना जताई गई है. इससे हिंद महासागर के तापमान में फेरबदल होगा जिसका असर आने वाले मानसून पर पड़ेगा. जनवरी और फरवरी महीने के डेटा के आधार पर एल नीनो के असर को लेकर अमेरिकी मौसम वैज्ञानिकों ने यह अनुमान जताया है. भारतीय मौसम वैज्ञानिक अप्रैल तक रुक कर इस बारे में कोई निश्चिच राय देने की बात कर रहे हैं.

IMD ने मानसून के अच्छे संकेत दिए थे, अब एल नीनो का झमेला कहां से?
अरब सागर में मानसून के वक्त जब तापमान ज्यादा होता है तो इसे पॉजिटिव आईओडी माना जाता है. अगर बंगाल की खाड़ी में ज्यादा तापमान पाया गया तो उसे निगेटिव आईओडी समझा जाता है. जिस साल पॉजिटिव आईओडी के संकेत मिलते हैं, उस साल मानसून में अच्छी बारिश होती है. अब तक तो भारतीय मौसम विभाग ने आगामी मानसून में अच्छी बारिश होने का ही अनुमान जताया है.

एल नीनो की क्यों चली बात? इससे कैसे जुड़े हैं मानसून के हालात?
अति उष्णता की वजह से दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तटीय भागों में पानी गर्म होने लगता है. इससे समुद्र के अंदरुनी पिछले हिस्से में भी तापमान बढ़ता है. इससे प्रशांत महासागर में निम्न दाब की पट्टी तैयार होती है. इससे हिंद महासागर की मानसूनी हवाओं की दिशा बदल जाती है. ये नमी वाली हवाएं निम्न दाब की वजह से दक्षिण अमेरिका का रुख कर लेती हैं. इससे भारत में मानसून के वक्त बारिश कम होती है. एल नीनो का प्रभाव हर तीन से सात सालों में पड़ता है. इससे ना सिर्फ मानसून में बारिश कम होती है बल्कि मानसून के बाद भी मौसम में गर्मी कायम रहती है.

महाराष्ट्र में सूखे के संभावित संकट से निपटने की शुरू है कोशिश, बोले फडणवीस
इससे पहले भारत में 2002, 2004, 2009 और 2009 में एल नीनो की वजह से सूखे का संकट आया था. ऐसे में खरीफ और रबी की फसल के वक्त सूखे के संकट से पहले ही सावधान हो जाने की जरूरत है. इस बीच बता दें कि विधानसभा में उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह आश्वस्त किया है कि सूखा की संभावना हुई तो उससे निपटने के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं. मुख्य सचिवों को इसके लिए प्लान तैयार करने को कहा गया है.

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