
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए हैं कि राज्य में प्राकृतिक आपदाओं से उच्च मूल्य वाली फसलों को होने वाले नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए कृषि विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग संयुक्त रूप से ड्रोन सर्वेक्षण करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से किसानों को हुए वास्तविक नुकसान का सही मूल्यांकन किया जा सकेगा और फसल बीमा कंपनियों द्वारा मुआवजा वितरण में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जलगांव जिले में केले की फसल को हुए नुकसान के मामलों में बीमा कंपनियों को स्थानीय प्रशासन के अभिलेखों, रियल टाइम डेटा, महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (एमआरएसएसी) तथा सैटेलाइट डेटा का सत्यापन कर पात्र किसानों को तत्काल मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। मंगलवार को विधान भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों की सुरक्षा के लिए फसल बीमा योजनाओं में व्यापक आर्थिक योगदान दिया है, इसलिए बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी है कि पात्र किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में जलगांव जिले में केले की फसल के लिए 99 हजार से अधिक बीमा आवेदन प्राप्त हुए थे और उपग्रह आधारित सत्यापन के माध्यम से वास्तविक खेती क्षेत्र का सटीक आकलन किया गया है। उन्होंने कहा कि केले की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 1.70 लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण उपलब्ध है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं, ओलावृष्टि, तेज हवाओं, अत्यधिक तापमान तथा अन्य जोखिमों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और प्रत्येक पात्र किसान को न्याय दिलाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीमा कंपनियों से किसानों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि वास्तविक नुकसान के अनुसार सहायता बिना अनावश्यक बाधाओं के प्रदान की जानी चाहिए। वहीं जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटिल ने प्रभावित केला उत्पादक किसानों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वय के साथ कार्य करने और पंचनामों के आधार पर मुआवजा प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। बैठक में जळगांव जिले में फसल बीमा की स्थिति, उपग्रह आधारित सत्यापन, पात्र एवं अपात्र बीमा प्रस्तावों तथा किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए लागू उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई।

