
जालना। इनपुट टैक्स क्रेडिट अनब्लॉक करने के लिए कथित रूप से रिश्वत मांगने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), जालना ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी के प्रेस नोट के अनुसार, राज्य कर सहायक आयुक्त कार्यालय, वस्तु एवं सेवा कर (GST), जालना वर्ग-2 में कार्यरत राज्य कर अधिकारी सुवर्णा रामेश्वर लोहिया (44) और निजी टैक्स सलाहकार अक्षय प्रेमचंद जैन उर्फ लोढ़ा (28) के खिलाफ कार्रवाई की गई है। एसीबी के मुताबिक, शिकायतकर्ता की इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की दुकान है। शिकायतकर्ता को 6 जून 2026 को राज्य कर अधिकारी सुवर्णा लोहिया की ओर से इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्लॉक किए जाने के संबंध में कारण बताओ नोटिस प्राप्त हुआ था। इसके बाद शिकायतकर्ता अपने टैक्स सलाहकार अक्षय लोढ़ा के साथ संबंधित कार्यालय पहुंचा। शिकायतकर्ता का इनपुट टैक्स क्रेडिट अनब्लॉक करने के लिए राज्य कर अधिकारी द्वारा ₹1 लाख रिश्वत की मांग किए जाने की शिकायत एसीबी को दी गई। शिकायत के आधार पर एसीबी ने 17 जुलाई 2026 को मामले का सत्यापन किया। प्रेस नोट में बताया गया है कि शिकायतकर्ता जब टैक्स सलाहकार अक्षय लोढ़ा के साथ अधिकारी के पास गया तो ₹1 लाख की मांग के बाद बातचीत में ₹90 हजार स्वीकार करने पर सहमति होने की बात सामने आई। हालांकि शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने एसीबी से संपर्क किया। इसके बाद 28 जुलाई 2026 को एसीबी ने जालना स्थित राज्य कर सहायक आयुक्त कार्यालय में जाल बिछाया। प्रेस नोट के अनुसार, कार्रवाई के दौरान टैक्स सलाहकार अक्षय लोढ़ा ने शिकायतकर्ता से ₹60 हजार की रिश्वत राशि पंचों के समक्ष स्वीकार की और उसे अपने टेबल के ड्रॉअर में रख लिया।
एसीबी के प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि रकम स्वीकार करने के बाद टैक्स सलाहकार ने राज्य कर अधिकारी सुवर्णा लोहिया को इसकी जानकारी दी। इसके बाद एसीबी ने कार्रवाई करते हुए मामले में दोनों को आरोपी बनाया। प्रेस नोट के अनुसार, राज्य कर अधिकारी सुवर्णा रामेश्वर लोहिया और टैक्स सलाहकार अक्षय प्रेमचंद जैन उर्फ लोढ़ा के खिलाफ पुलिस थाना कदीम जालना में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई। साथ ही मामले में आगे की जांच की जा रही है। एसीबी ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई लोकसेवक सरकारी काम करने के बदले स्वयं या किसी निजी व्यक्ति के माध्यम से रिश्वत की मांग करता है तो इसकी जानकारी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को दें। इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में निजी व्यक्तियों या मध्यस्थों के माध्यम से कथित रिश्वतखोरी के मामलों पर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच में यह सामने आना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में रिश्वत की कथित मांग और रकम स्वीकार करने की पूरी प्रक्रिया में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका रही और क्या इसमें अन्य कोई व्यक्ति भी शामिल था।

