
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। पशुपालन विभाग में वित्तीय अनियमितता और शासकीय दायित्वों के प्रति कथित लापरवाही के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सिकंदरपुर कर्ण क्षेत्र में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शरद शाक्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ बिना डीजल खरीदे 4,220 रुपये का कथित फर्जी बिल/वाउचर प्रस्तुत कर भुगतान लेने सहित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। विभागीय अभिलेखों के अनुसार, डॉ. शरद शाक्य पर वित्तीय अनियमितता, लेवी रजिस्टर में कथित हेरफेर तथा दही चौकी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित स्लॉटर हाउस में प्रमाणन कार्य के दौरान शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। शासनादेश में उनके विरुद्ध पद के दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारिता, घोर लापरवाही और शिथिलता बरतने का उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान गवाहों के बयानों को प्रभावित करने के आरोप भी सामने आए हैं। मामले की विभागीय जांच के लिए अपर निदेशक (ग्रेड-2), पशुपालन विभाग, कानपुर मंडल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। हालांकि, निर्धारित अवधि में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी। इसके बाद राज्यपाल के नाम से जारी आदेश के तहत डॉ. शरद शाक्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि पशुपालन विभाग में पूर्व में भी डीजल से संबंधित अनियमितताओं के मामलों में शासन स्तर पर कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि विभाग वित्तीय अनियमितता और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के मामलों को गंभीरता से ले रहा है तथा शासन के निर्देशों के अनुरूप दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। डॉ. शरद शाक्य के निलंबन के बाद पशुपालन विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें विभागीय जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

