
मुंबई। दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब केवल आधुनिक तकनीकी अवधारणा न रहकर उनके दैनिक जीवन की चुनौतियों को दूर करने वाला प्रभावी साधन बनती जा रही है। दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, शारीरिक एवं बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए एआई आधारित उपकरण, ऐप्स और डिजिटल सेवाएं बड़े पैमाने पर उपयोगी सिद्ध हो रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सहायक तकनीकों के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ सेवाएं विकसित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने किया। शुक्रवार को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की पृष्ठभूमि में “दिव्यांग व्यक्तियों के समावेशन एवं सशक्तिकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता” विषय पर प्री-समिट राउंडटेबल का आयोजन मुंबई के होटल इंटर कॉन्टिनेंटल में किया गया था। इस अवसर पर दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव तुकाराम मुंढे भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मुख्य सचिव अग्रवाल ने कहा कि एआई आधारित इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर, कृत्रिम हाथ-पैर, संचार सहायक उपकरण, आई-ट्रैकिंग और हेड-माउस जैसी तकनीकें दिव्यांग व्यक्तियों को स्वावलंबी जीवन जीने में सहायक हो रही हैं। बौद्धिक अक्षमता के क्षेत्र में, विशेष रूप से ऑटिज्म के निदान में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकारी सेवाओं में एआई के उपयोग से दिव्यांगजनों के लिए प्रक्रियाएं अधिक सरल और सुलभ बनाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बहुभाषी चैटबॉट और डिजिटल सहायता प्रणालियों के माध्यम से आवश्यक जानकारी, थैरेपी केंद्र, विशेष विद्यालय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ अब एक क्लिक पर उपलब्ध हो रहा है। इससे दिव्यांग न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि अपने परिवार का पालन-पोषण करने में भी सक्षम हो रहे हैं। गूगल, एआई, मेटा सहित लगभग सौ स्टार्टअप्स दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए कार्यरत हैं। एआई के माध्यम से दिव्यांगों के जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलावों के उदाहरणों के जरिए उन्होंने प्रेरणादायी अनुभव साझा किए। सचिव तुकाराम मुंढे ने कहा कि महाराष्ट्र में दिव्यांगों की संख्या, उनके अपंगता के प्रकार और आवश्यकताओं की सटीक जानकारी एकत्र कर उसके आधार पर नीतियां बनाई जा रही हैं। दिव्यांग व्यक्तियों को समाज और अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले सक्षम घटक बनाना ही सरकार का प्रमुख उद्देश्य है। एआई और मशीन लर्निंग के माध्यम से दिव्यांग सशक्तिकरण को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि सरकारी वेबसाइट और पोर्टल को दिव्यांगों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा रहा है। निकट भविष्य में एक समग्र और सुलभ डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा, जहां एक बार पंजीकरण करने के बाद पात्र सभी योजनाओं, आवश्यक दस्तावेजों और संबंधित जानकारी दिव्यांग व्यक्तियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इस अवसर पर “समावेशी एआई की क्षमता” और “समावेशी एआई के निर्माण में सरकार की भूमिका” विषय पर समूह चर्चा भी आयोजित की गई। पहले सत्र में विभिन्न विशेषज्ञों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि दूसरे सत्र में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, परामर्श कंपनियों, तकनीकी स्टार्टअप्स और दिव्यांग संसाधन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। दोनों सत्रों का संचालन प्राइमस पार्टनर्स की सह-संस्थापक आरती हरभजांका और देवरूप धार ने किया।



