
लेह। केंद्र सरकार ने लद्दाख में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लेह में विभिन्न डेयरी अवसंरचना परियोजनाओं और सहकारी पहलों का उद्घाटन किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, एस.पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में करगिल में 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेयरी प्लांट की आधारशिला रखी गई, जिसकी लागत करीब 25 करोड़ रुपये है। इसके अलावा लेह में पहले से मौजूद प्लांट में उत्पादन बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। साथ ही 45 लाख रुपये की लागत से एक मोबाइल लैब और एंड्रॉइड आधारित एएमसीएस ऐप लॉन्च किया गया, जिससे दूध की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। गृह मंत्री ने कहा कि सहकारिता मॉडल के जरिए लद्दाख की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां उत्पादित दूध, दही और पनीर की आपूर्ति आईटीबीपी और सेना जैसे बड़े उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और मदर डेयरी के सहयोग से लद्दाख के उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की योजना है। सरकार की योजना के अनुसार, आने वाले समय में लेह में 70 करोड़ रुपये की लागत से 50,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला नया डेयरी संयंत्र भी स्थापित किया जाएगा। साथ ही हर साल 500 उच्च नस्ल के पशु उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि दूध उत्पादन में वृद्धि हो सके। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डेयरी क्षेत्र में हुए विकास का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने बताया कि देश में दूध उत्पादन 2014-15 के 146 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 248 मिलियन टन हो गया है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी 307 ग्राम से बढ़कर 485 ग्राम तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में डेयरी नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जो अब 28 गांवों तक पहुंच चुका है और करीब 1700 दुग्ध उत्पादक इससे जुड़े हैं। सरकार का लक्ष्य इस नेटवर्क को और विस्तार देकर हर संभावित गांव तक पहुंचाना है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने लद्दाख को आत्मनिर्भर बनाने और सहकारिता के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने पर जोर दिया।




