Tuesday, March 24, 2026
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300% ज्यादा दौलत, 4 करोड़ का ‘पाप’! अजय शर्मा और रामपाल सिंह के भ्रष्टाचार की खुली फाइल, CBI का शिकंजा!

इंद्र यादव/झांसी, उत्तर प्रदेश। भ्रष्टाचार के दीमक को साफ करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की लखनऊ एंटी-करप्शन यूनिट ने एक बड़ी स्ट्राइक की है। झांसी में तैनात रहे सीजीएसटी (CGST) के दो अधीक्षक—अजय शर्मा और रामपाल सिंह—अब सीबीआई के जाल में पूरी तरह फंस चुके हैं। इन दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी पद की कुर्सी का इस्तेमाल कर अपनी तिजोरियां भरीं और महज चार साल के भीतर करोड़ों की अवैध संपत्ति बना डाली।चार साल की जांच, खुल गई ‘काली कमाई’ की फाइलसीबीआई की यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। एजेंसी ने 1 जनवरी 2022 से जनवरी 2026 तक की अवधि के दौरान इन दोनों अधिकारियों के बैंक खातों, निवेश और जमीन-जायदाद के दस्तावेजों को खंगाला। जांच में पाया गया कि इन अधिकारियों ने अपनी वैध सैलरी और आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज्यादा निवेश किया है।अधिकारीवार जांच का कच्चा चिट्ठा.1.अजय शर्मा (अधीक्षक, CGST)सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, अजय शर्मा के पास से मिली संपत्ति का आंकड़ा हैरान करने वाला है।निर्धारित आय: जांच अवधि में उनकी वैध कमाई लगभग 1.10 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी।मिली संपत्ति: उनके पास से 4.40 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति मिली।अवैध कमाई: उन्होंने लगभग 3.53 करोड़ रुपये (आय से 320% अधिक) अवैध तरीके से जुटाए।2. रामपाल सिंह (अधीक्षक, CGST)दूसरे अधिकारी रामपाल सिंह पर भी अलग से मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर भी अपनी आय के मुकाबले करोड़ों रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। सीबीआई ने इनके ठिकानों पर छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और बेनामी संपत्तियों के सुराग जुटाए हैं।प्रमुख बिंदु: आखिर कैसे फंसा शिकंजापद का दुरुपयोग: अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने टैक्स मामलों के निपटारे और व्यापारियों को राहत देने के नाम पर मोटी रकम वसूली।पारिवारिक निवेश: जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या यह पैसा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियों या शेल कंपनियों में निवेश किया गया है।कठोर कार्रवाई के संकेत: भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज इन मामलों में जल्द ही दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी भी संभव है।सीबीआई सूत्रों का कहना है: “यह तो बस शुरुआत है। इस जांच की आंच विभाग के कुछ अन्य छोटे और बड़े कर्मचारियों तक भी पहुंच सकती है जिन्होंने इन भ्रष्टाचार के खेल में बिचौलियों की भूमिका निभाई।”व्यापारियों और विभाग में हड़कंपझांसी जैसे व्यापारिक केंद्र में सीजीएसटी के दो बड़े अफसरों पर सीबीआई की इस कार्रवाई ने महकमे में खलबली मचा दी है। इस एफआईआर के बाद अब उन पुराने केसों को भी दोबारा देखा जा सकता है जिनमें इन अधिकारियों ने महत्वपूर्ण फैसले लिए थे।

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