
फिलहाल जलाशयों में करीब 95 प्रतिशत पानी; जलापूर्ति की शिकायतें दफ्तर में बैठकर नहीं, मौके पर जाकर हल करने के निर्देश
मुंबई। मुंबई में लागू 10 प्रतिशत पानी कटौती फिलहाल वापस नहीं ली जाएगी। बीएमसी के अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने स्पष्ट किया है कि मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले बांधों में 30 सितंबर तक 100 प्रतिशत जलभंडारण होने की स्थिति में ही पानी की स्थिति को संतोषजनक माना जा सकता है। 4 सितंबर 2026 तक विभिन्न जलाशयों में करीब 95 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। बीएमसी मुख्यालय में जल अभियंता विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान बांगर ने कार्यकारी अभियंताओं, उप अभियंताओं, दुय्यम अभियंताओं और सहायक अभियंताओं के साथ मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को नागरिकों से मिलने वाली पानी संबंधी शिकायतों का तत्काल और प्रभावी समाधान करने के निर्देश दिए। बांगर ने कहा कि पानी की अनियमित आपूर्ति, कम दबाव, अपर्याप्त जलापूर्ति, पानी वितरण के समय में बदलाव, पाइपलाइन लीकेज और अन्य तकनीकी समस्याओं की शिकायत मिलने पर केवल अस्थायी उपाय नहीं किए जाने चाहिए। समस्या के मूल कारण का पता लगाकर उसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पानी की शिकायतें कार्यालय में बैठकर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर हल की जाएं। संबंधित अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से क्षेत्र का दौरा करें, नागरिकों से संवाद करें और यह पता लगाएं कि आखिर समस्या कहां और क्यों पैदा हो रही है।
कम बारिश के कारण अभी नहीं हटेगी पानी कटौती
बैठक में बताया गया कि अगस्त 2026 में मुंबई में औसत से कम बारिश हुई है और सितंबर में भी औसत से कम बारिश होने की संभावना है। इसी कारण बीएमसी जलभंडारण की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। बांगर ने कहा कि 30 सितंबर को मुंबई को पानी देने वाले बांधों में 100 प्रतिशत जलभंडारण होने पर ही स्थिति को पूरी तरह संतोषजनक माना जा सकेगा। तब तक महानगर में लागू 10 प्रतिशत पानी कटौती वापस लेना संभव नहीं है। उन्होंने उपलब्ध पानी का उचित नियोजन और प्रभावी प्रबंधन करने के निर्देश दिए ताकि नागरिकों को यथासंभव सुचारू जलापूर्ति मिल सके।
10 प्रतिशत से ज्यादा कमी हुई तो तुरंत हस्तक्षेप करें अधिकारी
बांगर ने कहा कि पानी कटौती का सबसे ज्यादा असर अंतिम छोर की बस्तियों, ऊंचाई वाले इलाकों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ सकता है। 10 प्रतिशत कटौती के कारण जलापूर्ति पर कुछ असर स्वाभाविक है, लेकिन यदि किसी इलाके में 10 प्रतिशत से अधिक पानी की कमी महसूस हो रही है तो जल अभियंता विभाग तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करे। उन्होंने अधिकारियों को जलापूर्ति जोन के अनुसार निर्धारित दिनों में से कम से कम एक दिन पूर्ण दबाव से पानी देने का प्रयास करने को कहा, ताकि अंतिम छोर के इलाकों तक भी पर्याप्त दबाव के साथ पानी पहुंच सके। साथ ही मौजूदा पानी कटौती के बारे में जनप्रतिनिधियों और नागरिकों को उचित जानकारी देने तथा वितरण व्यवस्था में मौजूद खामियों की पहचान कर उन्हें बिना देरी दूर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि 10 प्रतिशत पानी कटौती का नागरिकों पर न्यूनतम असर पड़े। बैठक में उपायुक्त (विशेष अभियांत्रिकी) पुरुषोत्तम मालवदे और उप जल अभियंता मंगेश शेवाळे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

