घाटे से उबारने के लिए खर्च में कटौती और आय बढ़ाने पर जोर, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दिए निर्देश

मुंबई। महाराष्ट्र की ‘जीवनवाहिनी’ कही जाने वाली राज्य परिवहन महामंडल (ST) की बसों में अब बिना कंडक्टर बस सेवा को प्राथमिकता देने की तैयारी है। एसटी महामंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और मैनपावर पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए डिजिटल टिकटिंग, QR कोड और स्मार्ट कार्ड जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। बुधवार को परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने एसटी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इस दिशा में योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरनाईक ने कहा कि एसटी को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केवल आय बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनावश्यक खर्च पर भी नियंत्रण जरूरी है। इसके लिए पारंपरिक कार्यप्रणाली से बाहर निकलकर नए और अभिनव प्रयोग करने होंगे। विशेष रूप से बिना कंडक्टर वाली बस सेवाओं को प्राथमिकता देकर कुछ मार्गों पर कंडक्टर से संबंधित खर्च कम किया जा सकता है और यात्रियों को अधिक आसान तथा तेज सेवा उपलब्ध कराई जा सकती है। परिवहन मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बिना कंडक्टर बस सेवा को प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल टिकट प्रणाली, QR कोड, स्मार्ट कार्ड और अन्य आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम किया जाए। इससे टिकट व्यवस्था को सरल बनाने के साथ उपलब्ध मानव संसाधन का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसटी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सिर्फ टिकट किराए में बढ़ोतरी को विकल्प नहीं माना जा सकता। यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए आय के नए स्रोत तलाशना और साथ ही खर्च कम करना ही दीर्घकालिक समाधान है। सरनाईक ने एसटी महामंडल को आय के नए स्रोत विकसित करने, गैरजरूरी खर्च पर अंकुश लगाने और उपलब्ध संसाधनों तथा कर्मचारियों का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसटी का घाटा कम करने के साथ यात्रियों का भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। यात्रियों की बदलती जरूरतों, यात्रा के तौर-तरीकों और स्थानीय मांग को ध्यान में रखते हुए यात्री केंद्रित योजनाएं तैयार करने को भी कहा गया है। समय पर, सुरक्षित, स्वच्छ और भरोसेमंद बस सेवा उपलब्ध कराना एसटी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि एसटी केवल सार्वजनिक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के आम नागरिकों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए एसटी को आर्थिक रूप से मजबूत बनाते समय यात्रियों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और आधुनिक, प्रभावी तथा किफायती सेवा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

