25 प्रमुख योजनाओं का होगा मूल्यांकन, सालभर में 46,400 लाभार्थियों से सीधे लिया जाएगा फीडबैक

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों का जमीनी स्तर पर कितना असर हो रहा है और सार्वजनिक धन खर्च करने के बाद अपेक्षित परिणाम मिल रहे हैं या नहीं, इसकी अब व्यवस्थित और स्वतंत्र रूप से पड़ताल की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ‘महाराष्ट्र टेक्निकल असिस्टेंस सेल’ (महा-टैक) स्थापित करने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस व्यवस्था से लोककल्याणकारी योजनाओं के मूल्यांकन और प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी तथा सरकार को डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री के सरकारी निवास ‘वर्षा’ पर फडणवीस की अध्यक्षता में महा-टैक की स्थापना को लेकर आईआईएम मुंबई की ओर से प्रस्तुतीकरण दिया गया। महा-टैक को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), मुंबई और सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (सीआरआईएसपी) के सहयोग से संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार कई जनकल्याणकारी योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं का लाभ प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से जनता तक पहुंचना आवश्यक है। योजनाओं के क्रियान्वयन की सटीक और वस्तुनिष्ठ जानकारी समय पर उपलब्ध होने से कमियों की पहचान कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। इसलिए प्रत्येक योजना की विस्तृत जानकारी, उसके क्रियान्वयन और लाभार्थियों पर पड़े प्रभाव से संबंधित डेटा महा-टैक के पास उपलब्ध कराया जाएगा। महा-टैक के माध्यम से राज्य सरकार की 25 प्रमुख नीतियों का विश्लेषण किया जाएगा। विभिन्न विभागों की योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करने और निर्णय प्रक्रिया को गति देने के लिए 13 ‘सशक्त अभियान’ स्थापित किए जाएंगे। इनमें लॉजिस्टिक्स और मैरीटाइम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा। इन अभियानों के उद्देश्य और आवश्यक अधिकार मंत्रिमंडल की मंजूरी से तय किए जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य की 25 प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं का हर तीन महीने में स्वतंत्र फील्ड सर्वेक्षण किया जाएगा। प्रत्येक तिमाही में राज्य के 12 जिलों में 11,600 लाभार्थियों से सीधे बातचीत कर योजनाओं के असर की जानकारी जुटाई जाएगी। इसके अलावा करीब 1,500 वंचित लोगों की स्थिति का भी अध्ययन किया जाएगा। इस तरह सालभर में कुल 46,400 लाभार्थियों के साक्षात्कार लेकर योजनाओं के नियमों के पालन, खर्च की प्रभावशीलता, लाभार्थियों तक वास्तविक पहुंच और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय का मूल्यांकन किया जाएगा। महा-टैक का जोर केवल इस बात पर नहीं रहेगा कि योजना नियमों के अनुसार लागू हुई या नहीं, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वास्तव में लाभार्थियों तक उसका लाभ पहुंचा या नहीं और सरकारी खर्च के मुकाबले कितना परिणाम हासिल हुआ। फील्ड सर्वेक्षण और डेटा विश्लेषण से सामने आने वाली कमियों के आधार पर प्रशासन तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई कर सकेगा। यह कक्ष मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव और सेवानिवृत्त सचिवों की उच्चाधिकार समिति के प्रति जवाबदेह रहेगा। तकनीकी टीम उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण, फील्ड सर्वेक्षण और योजनाओं के परिणामों का मूल्यांकन करने के साथ सरकार को आवश्यक सुधार एवं नीतिगत फैसलों के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी। बैठक में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा म्हैसकर, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव वेणुगोपाल रेड्डी, आईआईएम मुंबई के निदेशक मनोज कुमार तिवारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

