
छात्रों की शैक्षणिक योग्यता के साथ नेतृत्व, खेल, संस्कृति, नवाचार और सामाजिक योगदान का भी होगा मूल्यांकन
मुंबई। विद्यार्थियों की सर्वांगीण प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए महाराष्ट्र के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों—मुंबई विश्वविद्यालय, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय—में अब ‘कुलपति पदक’ प्रदान किया जाएगा। राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति जिष्णु देव वर्मा की पहल पर शुरू किए जा रहे इस उपक्रम के लिए बुधवार को मुंबई स्थित लोकभवन में तीनों विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं को राज्यपाल के हाथों 10-10 लाख रुपये के प्रतीकात्मक चेक प्रदान किए गए। इसी अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने ‘इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एंड डिजिटल लर्निंग: इंडस्ट्री-अकादमिक कोलैबोरेशन फॉर इम्प्रूविंग एम्प्लॉयबिलिटी’ पहल का भी शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा और उद्योग जगत के बीच समन्वय बढ़ाकर विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को मजबूत करना है।
केवल पढ़ाई नहीं, सर्वांगीण प्रतिभा बनेगी पदक का आधार
राज्यपाल ने कहा कि ‘कुलपति पदक’ को केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, खेल एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में प्रदर्शन, सामाजिक प्रतिबद्धता और विश्वविद्यालय के लिए विशेष योगदान को भी चयन का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों से पदक के लिए विद्यार्थियों के चयन हेतु पारदर्शी और योग्यता आधारित मानदंड निर्धारित करने को कहा। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना और उन्हें बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है। राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे ने बताया कि ‘कुलपति पदक’ कक्षा और प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर खेल के मैदान, रंगमंच, समाजसेवा और नवाचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता का प्रतीक बने, यही इस पहल की मूल भावना है।
एआई से साइबर सुरक्षा तक आधुनिक तकनीक पर जोर
रोजगार के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम, कौशल विकास, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, अनुसंधान और नवाचार को उद्योग तथा अर्थव्यवस्था की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों की बुनियादी जानकारी देने पर भी जोर दिया गया।
सामाजिक अभियानों से भी जुड़ेंगे विश्वविद्यालय
राज्यपाल ने महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों की भागीदारी के लिए टीबी मुक्त महाराष्ट्र अभियान, नशामुक्त भारत अभियान तथा राज्य की विलुप्त होती कला और पारंपरिक विरासत के संरक्षण एवं पुनरुद्धार से जुड़े तीन प्रमुख सामाजिक उपक्रमों को भी आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रति उनकी व्यापक जिम्मेदारी भी है। इसलिए विश्वविद्यालयों को इन सामाजिक अभियानों में सक्रिय भागीदार की भूमिका निभानी चाहिए।
डॉ. प्रशांत नारनवरे ने बताया कि तेलंगाना के राज्यपाल रहते हुए जिष्णु देव वर्मा ने प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए इसी प्रकार की पहल शुरू की थी। महाराष्ट्र के राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद उन्होंने यहां भी ‘कुलपति पदक’ शुरू करने की इच्छा जताई थी, जिसे अब मूर्त रूप दिया गया है। कार्यक्रम में मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश गोसावी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्र-कुलगुरु, निदेशक, अधिष्ठाता, प्राचार्य, उद्योग एवं शिक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधि, प्रसिद्ध पूर्व विद्यार्थी, खेल पुरस्कार विजेता और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

