
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने कोई दूसरी पार्टी ज्वाइन नहीं की और न ही शिवसेना छोड़ी, बल्कि बहुमत के साथ शिवसेना में ही रहे। शिंदे ने कहा कि लोकतंत्र में बहुमत का महत्व होता है और कांग्रेस के साथ गठबंधन किए जाने के कारण शिवसेना के भीतर असंतोष पैदा हुआ था। दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिंदे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे कहा करते थे कि उनकी शिवसेना कभी अपनी विचारधारा से अलग नहीं हो सकती और कांग्रेस नहीं बन सकती, अन्यथा वे अपनी दुकान बंद कर देंगे। लेकिन बालासाहेब के बाद क्या हुआ, यह पूरे महाराष्ट्र ने देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का संविधान और विचार बदल दिए गए, आंतरिक चुनाव कराने के बजाय नियुक्तियां और मनमानी शुरू हो गई। शिंदे ने कहा, “हम दूसरी पार्टी में नहीं गए। हम शिवसेना में ही हैं और शिवसेना का ही मुख्यमंत्री बना। हम किसी तीसरे दल में नहीं गए और हमने पार्टी नहीं बदली। हम बहुमत के साथ शिवसेना में ही रहे।” उन्होंने आरोप लगाया कि बालासाहेब के विचारों और हिंदुत्व को ‘फ्रीज’ कर दिया गया और अब ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह को भी फ्रीज करने की मांग की जा रही है। शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जारी न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए शिंदे ने कहा कि सत्य सामने आएगा और “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान खतरे में होने की बात करने वालों को पहले अपनी पार्टी के भीतर लोकतंत्र की स्थिति देखनी चाहिए और आत्ममंथन करना चाहिए। संगठन विस्तार को लेकर शिंदे ने बताया कि शिवसेना को बालासाहेब ठाकरे के ‘80 प्रतिशत समाजसेवा और 20 प्रतिशत राजनीति’ के सिद्धांत पर जमीनी स्तर तक मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला आघाड़ी और युवासेना को अधिक सक्रिय करने के साथ जिलाप्रमुख से लेकर बूथ प्रमुख तक संगठन को मजबूत करने का काम दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। आगामी चुनाव एनडीए के रूप में लड़ने की रणनीति के तहत जहां आवश्यकता होगी वहां भाजपा और सहयोगी दलों की मदद की जाएगी, जबकि जिन सीटों पर शिवसेना की मजबूत संभावना है, उनका प्रस्ताव एनडीए के समक्ष रखा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक राज्यभर में जनहित और सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया है। मराठा आरक्षण के मुद्दे पर शिंदे ने कहा कि 1994 में मंडल आयोग के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार के नेतृत्व वाली सरकार के पास मराठा समाज को ओबीसी में शामिल करने का अवसर था, लेकिन उस समय निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद महायुति सरकार ने आरक्षण के मुद्दे पर काम शुरू किया और उनके मुख्यमंत्री रहते मराठा समाज को 10 प्रतिशत आरक्षण, कुणबी प्रमाणपत्र तथा करीब 5,200 नौकरियों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। शिंदे ने कहा कि किसी भी समाज के आरक्षण को कम किए बिना संविधान के दायरे में मराठा समाज की न्यायसंगत मांगों को न्याय देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

