
1995 से अब तक 17,325 जीवित दाता अंग प्रत्यारोपण; मरणोपरांत अंगदान से 3,373 जरूरतमंदों को मिला जीवनदान
मुंबई। महाराष्ट्र में मानव अंग प्रत्यारोपण कानून लागू होने और वर्ष 2011 तथा 2014 में किए गए संशोधनों के बाद अंगदान को लेकर लगातार सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। राज्य में हजारों जरूरतमंद मरीजों को अंग प्रत्यारोपण के जरिए नया जीवन मिला है। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने इस दिशा में और तेजी लाने के लिए पूरे महाराष्ट्र में व्यापक अंगदान जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया है। राज्य सरकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण समन्वय संस्था तथा मुंबई, पुणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर स्थित विभागीय अंग प्रत्यारोपण समन्वय केंद्रों के संयुक्त प्रयास से राज्यभर में अंगदान को लेकर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1995 से अक्टूबर 2026 तक महाराष्ट्र में जीवित दाताओं से कुल 17,325 अंग प्रत्यारोपण किए गए। इनमें 14,949 किडनी और 2,376 लिवर प्रत्यारोपण शामिल हैं। इसी अवधि में मरणोपरांत अंगदान के जरिए कुल 3,373 जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला। इनमें 1,853 किडनी, 987 लिवर, 220 हृदय, 63 फेफड़े तथा नेत्र एवं ऊतकों सहित 250 अन्य अंगों के प्रत्यारोपण शामिल हैं।
अंगों के इंतजार में हजारों मरीज
स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर के अनुसार, राज्य में अभी भी बड़ी संख्या में मरीज विभिन्न अंगों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इनमें किडनी के लिए 4,075, लिवर के लिए 888, हृदय के लिए 63, फेफड़ों के लिए 24, अग्न्याशय के लिए 15, हाथ प्रत्यारोपण के लिए 11 और छोटी आंत के लिए 8 मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं। इन मरीजों को समय पर अंग उपलब्ध कराने के लिए नागरिकों से लगातार अंगदान की अपील की जा रही है।
‘जुगजुग जियो अभियान’ से अंगदान के प्रति जगाई जागरूकता
केंद्र सरकार के ‘अंगदान-जीवन संजीवनी अभियान’ के तहत महाराष्ट्र में 3 अगस्त से 15 अगस्त 2026 के बीच ‘जुगजुग जियो अभियान’ चलाया गया। इसके साथ ही 2 से 15 अगस्त तक पूरे राज्य में ‘अंगदान पखवाड़ा’ मनाया गया और 13 अगस्त को 16वां अंगदान दिवस आयोजित किया गया। अभियान के दौरान डिजिटल सूचना पुस्तिकाओं का प्रसार किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रसिद्ध हस्तियों और धर्मगुरुओं के संदेश वीडियो के माध्यम से लोगों तक पहुंचाए गए। अंग प्रत्यारोपण से नया जीवन पाने वाले लाभार्थियों के प्रेरणादायी अनुभव भी साझा किए गए। नागरिकों की भागीदारी आसान बनाने के लिए आधिकारिक वेबसाइट और क्यूआर कोड के माध्यम से अंगदान की प्रतिज्ञा दर्ज कराने की व्यवस्था की गई। राज्य के विभिन्न सरकारी और अर्धसरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी अंगदान की शपथ ली। स्वास्थ्य व्यवस्था के जमीनी स्तर तक अभियान पहुंचाने के लिए जिला अस्पतालों, उपजिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत चिकित्सकों, नर्सों एवं अन्य कर्मचारियों के लिए विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए और उनसे अंगदान के संकल्प पत्र भरवाए गए। युवा पीढ़ी को अंगदान का महत्व समझाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में जनजागरण रैलियां, चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। सरकारी एवं निजी अस्पतालों में जागरूकता संबंधी पोस्टर और सूचना फलक लगाए गए। अंगदान करने वाले दिवंगत दाताओं के परिवारों को सम्मानित कर उनके प्रति कृतज्ञता भी व्यक्त की गई। स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने बताया कि अंगदान को बढ़ावा देने के लिए पथनाट्य, सिनेमाघरों में विज्ञापन, आकाशवाणी संदेश, परिसंवाद और लघु फिल्मों के प्रदर्शन के माध्यम से ‘महा अंगदान महोत्सव’ भी आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों और अंधविश्वासों को दूर करने में मदद मिल रही है और समाज में अंगदान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।

