
ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर क्षेत्र में चर्चित शिक्षा सेवक प्रकरण में आखिरकार कार्रवाई शुरू हो गई है। ठाणे जिला परिषद (ZP) के शिक्षा विभाग ने संबंधित मुख्याध्यापक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। यह मामला शिक्षा सेवक श्रीमती सुगंधा बालकृष्ण पाटील (देवयानी दीपक देसले) से जुड़ा है, जिन्हें नियुक्ति आदेश होने के बावजूद स्कूल के हाजिरी रजिस्टर में हस्ताक्षर करने से रोका जा रहा था। इसके साथ ही उन्हें पिछले 12 महीनों से वेतन भी नहीं मिला था, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट में थीं। मामला सामने आने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता मनिषा पोल के नेतृत्व में आंदोलन शुरू किया गया। उन्होंने “मजदूर दिवस पर किसी कामगार को भूखा नहीं रहने देंगे” का संदेश देते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आंदोलन के चलते स्थानीय स्तर पर व्यापक जनसमर्थन और आक्रोश देखने को मिला। प्राथमिक जांच में मुख्याध्यापक द्वारा नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलने पर शिक्षा विभाग ने तत्काल नोटिस जारी किया है। संबंधित अधिकारी को 8 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। दोष सिद्ध होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इस बीच आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। इनमें 12 महीनों के बकाया वेतन की प्रक्रिया शुरू करना, शिक्षा सेवक को नियमित उपस्थिति का अधिकार देना, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में संतोष का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक शिक्षिका की जीत नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और न्याय की जीत है।




