
भूपेंद्र सिंह / उन्नाव, उत्तर प्रदेश। बांगरमऊ क्षेत्र इन दिनों मिलावटखोरों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। सरसों के तेल से लेकर दूध, खोया, घी और पनीर जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में बड़े पैमाने पर मिलावट किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। मामूली मुनाफे के लिए मिलावटखोर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में खतरनाक तरीके से मिलावट की जा रही है। सरसों के तेल में ‘आरजीमोन’ (सत्यानाशी) के बीज का तेल और सस्ता पाम ऑयल मिलाया जा रहा है, जबकि रंग गहरा करने के लिए हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए डिटर्जेंट, यूरिया और रिफाइंड तेल मिलाकर ‘सिंथेटिक दूध’ तैयार किया जा रहा है। इसी मिलावटी दूध से पनीर और खोया भी बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है। शुद्ध देसी घी के नाम पर वनस्पति घी और अन्य पदार्थों की मिलावट भी चर्चा में है। स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहा है। जहरीले रसायनों का सीधा असर शरीर के मुख्य अंगों पर पड़ रहा है, जिससे लीवर और किडनी संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक ऐसे तेल और केमिकल युक्त दूध का सेवन कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारण बन सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट दर्द के मामले भी बढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि त्योहारों के दौरान खाद्य विभाग की टीमें केवल औपचारिकता निभाते हुए सैंपल लेती हैं, जबकि सामान्य दिनों में मिलावटखोर बेखौफ होकर कारोबार चला रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खुला तेल या घी खरीदने से बचने, दूध और पनीर की घर पर ही साधारण तरीकों से जांच करने तथा संदिग्ध खाद्य पदार्थ मिलने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की अपील की गई है। चेतावनी दी जा रही है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी बड़ी त्रासदी सामने आ सकती है।




