
पुणे। लता-आशा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज हॉस्पिटल प्रोजेक्ट में मरीजों के इलाज के लिए ज़रूरी सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इस काम में कई लोग मदद कर रहे हैं। सरकार भी ऐसे चैरिटेबल प्रोजेक्ट्स में सहयोग करने की कोशिश करेगी। हॉस्पिटल तक पहुंचने के लिए काफ़ी चौड़ी सड़क और पानी की सुविधा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ज़रिए दी जाएगी। चैरिटेबल संस्थाओं की बिल्डिंग्स के लिए परमिशन देते समय लिए जाने वाले प्रीमियम में कुछ छूट देने पर भी विचार किया जाएगा, ऐसा मुख्यमंत्री फडणवीस ने भरोसा दिलाया। गुरुवार को वे नांदोशी में लता मंगेशकर मेडिकल फाउंडेशन द्वारा स्थापित किए जा रहे ‘लता-आशा मंगेशकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ अस्पताल परियोजना के शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे, महापौर मंजुषा नागपुरे, डॉ. मोहन भागवत, हृदयनाथ मंगेशकर, उषा मंगेशकर सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आज हर व्यक्ति को किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलना जरूरी है। उन्होंने दिनानाथ मंगेशकर अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि सेवा और व्यावसायिकता का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए, यह इस संस्थान ने दिखाया है। नए अस्पताल में विभिन्न चिकित्सा पद्धतियां, पुनर्वास केंद्र और कैंसर उपचार सुविधाएं उपलब्ध होने से मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। मंगेशकर परिवार की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर और आशा भोसले ने जीवनभर संगीत सेवा के साथ-साथ देशसेवा का भी कार्य किया। इस अस्पताल परियोजना के माध्यम से उनके सेवा भाव को आगे बढ़ाया जाएगा।उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह परियोजना हजारों मरीजों को नया जीवन देगी और समाज में आशा का संचार करेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पताल में संगीत चिकित्सा (म्यूजिक थेरेपी) की सुविधा भी विकसित की जाए, जहां मरीजों को लता दीदी और आशा भोसले के गीत सुनाए जा सकें। डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि सेवा का भाव अपनेपन से उत्पन्न होता है और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ही स्थान पर सभी प्रकार की चिकित्सा उपलब्ध होने से मरीजों का खर्च कम होता है और उपचार अधिक प्रभावी बनता है। कार्यक्रम में बताया गया कि यह अस्पताल लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसे देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से विशेष रूप से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।




