
मुंबई। मुंबई में शुक्रवार को दो अलग-अलग स्थानों पर हुई दर्दनाक घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। एक ओर मलाड पश्चिम स्थित अक्सा बीच पर 17 वर्षीय किशोर के समुद्र में डूबने की आशंका के बाद कई एजेंसियों ने घंटों तक संयुक्त खोज एवं बचाव अभियान चलाया, वहीं दूसरी ओर वर्ली सी लिंक से समुद्र में छलांग लगाने वाले 51 वर्षीय व्यवसायी का शव बरामद कर लिया गया। मलाड पश्चिम के अक्सा बीच पर दोपहर करीब 3:53 बजे आईएनएस हमला और शीतला देवी मंदिर के बीच स्थित समुद्री तट पर एक 17 वर्षीय किशोर के लापता होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड (MFB) ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। समुद्र में तेज़ लहरों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बचाव दल लगातार किशोर की तलाश में जुटा रहा। मुंबई फायर ब्रिगेड के अनुरोध पर भारतीय नौसेना को भी अलर्ट किया गया और खोज अभियान में शामिल किया गया। इसके अलावा मुंबई पुलिस, 108 एम्बुलेंस सेवा तथा अन्य राहत एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। हालांकि शाम तक किशोर का कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद रात करीब 8:19 बजे अभियान को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि मामले में आगे की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार की जाएगी।
इसी दिन एक अन्य दुखद घटना में वर्ली सी लिंक पर ठाणे निवासी 51 वर्षीय व्यवसायी भावेश नवीनचंद्र मजेठिया ने कथित रूप से समुद्र में छलांग लगा दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उन्होंने टैक्सी चालक से तबीयत खराब होने और मितली आने की बात कहकर वाहन रुकवाया। जैसे ही टैक्सी रुकी, उन्होंने सी लिंक से समुद्र में छलांग लगा दी। घटना की सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे। खराब मौसम और ऊंची लहरों के कारण राहत एवं बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन काफी प्रयासों के बाद पुलिस ने समुद्र से उनका शव बरामद कर लिया। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद वर्ली सी लिंक क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने आवश्यक पंचनामा और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए वर्ली पुलिस स्टेशन में आकस्मिक मृत्यु (ADR) का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब घटना के सभी संभावित कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच कर रही है। मुंबई में एक ही दिन हुई इन दोनों घटनाओं ने समुद्री तटों पर सुरक्षा व्यवस्था, मौसम संबंधी सावधानियों और आपातकालीन बचाव तंत्र की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है।

