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तारातला गोदाम हादसे के बाद मुख्यमंत्री की सख्ती: अवैध निर्माण पर विशेष ऑडिट, आपदा प्रबंधन के लिए भर्ती होंगे 200 ‘अग्निवीर’ युवा

कोलकाता। पश्चिम कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की दर्दनाक घटना के बाद राज्य सरकार ने अवैध निर्माण और भवन निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि किसी नगर निकाय क्षेत्र में भवन निर्माण योजना (बिल्डिंग प्लान) पास कराने के नाम पर कोई अधिकारी या व्यक्ति रिश्वत मांगता है या दबाव बनाता है, तो संबंधित नागरिक तत्काल स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग (PWD) परिसर में राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में नगर विकास मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कोलकाता पुलिस आयुक्त, कोलकाता नगर निगम (KMC) आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में तारातला हादसे की समीक्षा के साथ-साथ राज्यभर में अवैध निर्माणों पर नियंत्रण के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) समेत अन्य एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौसम अनुकूल रहने पर बचाव अभियान शीघ्र पूरा किया जा सकेगा। हादसे के मद्देनज़र राज्य सरकार ने 31 जुलाई तक विशेष भवन ऑडिट अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत कोलकाता नगर निगम के अलावा बिधाननगर, राजारहाट-न्यू टाउन, एनकेडीए क्षेत्र, पुजाली, बारुईपुर, महेशतला, राजपुर-सोनारपुर, दक्षिण दमदम, कमरहाटी और बारानगर सहित कई शहरी क्षेत्रों में अवैध एवं संदिग्ध निर्माणों की जांच की जाएगी। इस कार्य में आईआईटी खड़गपुर और राइट्स (RITES) जैसी विशेषज्ञ संस्थाओं की भी सहायता ली जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जी+5 (ग्राउंड प्लस पांच मंजिल) या उससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों को हाई-राइज भवन माना जाएगा। सरकारी परियोजनाएं, रेलवे, मेट्रो, बंदरगाह और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े निर्माण इस विशेष ऑडिट से बाहर रहेंगे। वहीं, सामान्य आवासीय मरम्मत, बालकनी या रसोई निर्माण जैसे छोटे कार्यों को भी इस जांच में शामिल नहीं किया जाएगा। ऑडिट के दौरान निर्माणाधीन बहुमंजिला एवं व्यावसायिक भवनों के डिजाइन, सॉयल टेस्ट रिपोर्ट, निर्माण स्वीकृति और कानूनी वैधता की विस्तृत जांच की जाएगी। साथ ही, अगले 90 दिनों के भीतर हाई-राइज इमारतों में फायर सेफ्टी सिस्टम और तड़ित चालक की कार्यक्षमता का विशेष ऑडिट कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि तारातला हादसे के सिलसिले में प्रमोटर और ब्रोकर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा, संबंधित भवन का डिज़ाइन तैयार करने वाले आर्किटेक्ट और प्लानर को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती गई और इस मामले में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष आपदा प्रबंधन रैपिड रिस्पांस टीम गठित करने की भी घोषणा की है। अगले दो महीनों में नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन के लिए 200 अग्निवीर युवाओं को प्रशिक्षित कर तैनात किया जाएगा। इनमें 100 को कोलकाता, 50 को सुंदरबन और 50 को पहाड़ी क्षेत्रों में नियुक्त किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है तथा आगामी दुर्गा पूजा से पहले आपदा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा है। गौरतलब है कि बुधवार को तारातला क्षेत्र में निर्माणाधीन गोदाम ढहने से अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राहत एवं बचाव दल को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोग फंसे हो सकते हैं। पुलिस मृतकों की पहचान और हादसे के कारणों की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।

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