
इंजी.अतिवीर जैन ‘पराग’
श्री राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में आखिरकार बीस दिन बाद एफआईआर दर्ज हो गई। आठ लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। यह एफआईआर एसआईटी की रिपोर्ट मिलने के बाद दर्ज हुई है। इसके साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। यह स्वागतयोग्य कदम है। कोई भी जांच निष्पक्ष रूप से तब तक नहीं हो सकती जब तक ट्रस्ट में वही अधिकारी बैठे हों जिन्होंने आरोपित कर्मचारियों को नियुक्त किया था। हालांकि चंपत राय जैसे व्यक्तित्व पर हेराफेरी का आरोप लगाना बेमानी होगा। लेकिन व्यवस्थागत कमी जरूर रही कि अपने नियुक्त कर्मचारियों पर अंधा विश्वास किया गया और हेराफेरी की सूचना मिलने पर भी कार्रवाई नहीं हुई। इसी ढिलाई से आरोपियों के हौसले बढ़े और वे चढ़ावे में चोरी करते रहे। इस हेराफेरी का खुलासा भी चोरी के बंटवारे पर मतभेद होने के कारण दूसरे कर्मचारियों ने किया। पहले भी श्री राम मंदिर के लिए जमीन खरीद-बिक्री में करोड़ों के घोटाले के आरोप लगे थे। उस समय भी ट्रस्ट ने संज्ञान नहीं लिया। यदि तभी जांच होती तो शायद यह क्रम चढ़ावे की चोरी तक नहीं पहुंचता। किसी भी मंदिर में भक्त श्रद्धा और आस्था से दान चढ़ाते हैं। कई भक्त अपनी हैसियत से बढ़कर सोना-चांदी तक अर्पित कर देते हैं। चढ़ावा चोरी के खुलासे के बाद कई बड़े दानियों ने दान का हिसाब मांगना शुरू कर दिया है। विश्व सिंधी समाज ने 2021 में चांदी की दो सौ ईंटें ट्रस्ट को भेंट की थीं। ट्रस्ट के सचिव का आरोप है कि आज तक भेंट की रसीद नहीं दी गई। राम मंदिर ट्रस्ट बताए कि इस चांदी का प्रयोग कहां किया गया? रसीद क्यों नहीं दी गई? इसी तरह के अन्य खुलासे सामने आ रहे हैं। यह भी जांच का विषय है कि क्या यह हेराफेरी 2021 से ही चल रही थी? इस खुलासे से विपक्षी दलों को भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद पर प्रहार का मौका मिल गया। ये वही दल हैं जो दशकों तक श्री राम मंदिर न बने, इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करते रहे। पर ऐसे मुद्दों को उठाना ही विपक्ष का काम है। चढ़ावा चोरी का मामला सामान्य चोरी से कहीं बड़ा है। यह भक्तों की आस्था से खिलवाड़ है, जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
लोगों को अभी भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर विश्वास है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कोई भी अपराधी नहीं बचेगा। गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारी चढ़ावे में हेराफेरी करते दिख रहे हैं। सवाल है कि क्या ट्रस्ट के अधिकारी या सदस्य सीसीटीवी फुटेज कभी देखते ही नहीं थे? इस घोटाले के पूरे खुलासे में समय लगेगा। अपराधी जेल जाएंगे, अदालतों में मुकदमा चलेगा। निर्णय और दंड में समय लगना तय है। यह लंबी प्रक्रिया है। तत्काल स्तर पर सरकार को चाहिए कि इस ट्रस्ट को भंग कर सभी कर्मचारियों को हटाए और एक वरिष्ठ सरकारी सचिव के नेतृत्व में नया बोर्ड गठित करे। मंदिर व्यवस्था में ऐसे सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों या सेवानिवृत्त फौजी अधिकारियों को लगाया जाए जिनकी निष्ठा पर संदेह न हो। सीबीआई, इंटेलिजेंस, पुलिस जैसी सेवाओं से सेवानिवृत्त ईमानदार अधिकारियों का दो सौ लोगों का समूह बनाकर व्यवस्था सौंपी जानी चाहिए, जब तक यह पर्दाफाश न हो कि नीचे से ऊपर तक कौन-कौन शामिल है। प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया अपने समय से चलेगी पर चढ़ावे में हेराफेरी का दंड श्री राम स्वयं इन अपराधियों को देंगे। भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। कानून की मार से भले बच जाओ, पर भगवान के दरबार से बचकर कहां जाओगे? (लेखक रक्षा मंत्रालय के पूर्व उपनिदेशक हैं।)



