
देवेश प्रताप सिंह राठौर/ झांसी, उत्तर प्रदेश। झांसी में मण्डलायुक्त बिमल कुमार दुबे के मुख्य आतिथ्य में एक प्रेरणादायक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें एडवोकेट राम प्रकाश अग्रवाल एवं उनकी धर्मपत्नी मधु अग्रवाल द्वारा मरणोपरांत देहदान के संकल्प को लेकर उन्हें सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम आयुक्त कार्यालय स्थित बार संघ सभागार में आयोजित हुआ, जहां डिवीजनल बार एसोसिएशन झांसी के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं ने प्रशस्ति पत्र देकर उनका आभार व्यक्त किया। अपने संबोधन में मण्डलायुक्त बिमल कुमार दुबे ने कहा कि भारतीय परंपरा में दान की महत्ता अत्यधिक रही है, लेकिन मानव कल्याण के लिए देहदान सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। उन्होंने महर्षि दधीचि का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने अपनी अस्थियों का दान कर देवताओं की सहायता की थी। इसी तरह आज के समय में भी देहदान मानवता के लिए सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) के माध्यम से कोई भी व्यक्ति पंजीकरण कराकर मरणोपरांत अंगदान या देहदान का संकल्प ले सकता है। इस अवसर पर एडवोकेट राम प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि मनुष्य जीवन सबसे श्रेष्ठ है और इसे समाज के कल्याण के लिए उपयोग करना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने देहदान को एक पुनीत कार्य बताते हुए कहा कि इस संकल्प से उन्हें गर्व और संतोष का अनुभव हो रहा है। कार्यक्रम में देवराज सिंह कुशवाहा, अध्यक्ष डिवीजनल बार एसोसिएशन झांसी ने बताया कि 20 मार्च 2026 को राम प्रकाश अग्रवाल एवं मधु अग्रवाल ने महारानी लक्ष्मीबाई चिकित्सा महाविद्यालय के शरीर रचना (एनाटॉमी) विभाग को देहदान का संकल्प लिया है। उन्होंने इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक और अनुकरणीय कदम बताते हुए कहा कि यह कार्य वर्तमान युग में महर्षि दधीचि की परंपरा को जीवंत करता है। इस दौरान अपर आयुक्त न्यायिक प्रियंका, महामंत्री एडवोकेट लक्ष्मी प्रसाद यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एडवोकेट राजीव कुमार मिश्रा, कनिष्ठ उपाध्यक्ष एडवोकेट नीरज कुमार यादव, कोषाध्यक्ष एडवोकेट तेज सिंह जादौन, सहायक सचिव एडवोकेट अशोक कुमार वर्मा, संयुक्त सचिव एडवोकेट हरनारायण उपाध्याय, ऑडिटर एडवोकेट नूरुद्दीन सिद्दकी सहित अनेक अधिवक्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
यह आयोजन समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मानव सेवा के इस सर्वोच्च कार्य के लिए लोगों को प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।




