
मुंबई। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मुंबई के लोकभवन में वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर माताओं, वीर पत्नियों और उनके परिवारों के सम्मान में कृतज्ञता समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल सैन्य विजय की स्मृति नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ के आदर्श को जीवन में अपनाकर एकजुट, सक्षम और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। सांस्कृतिक कार्य संचालनालय द्वारा आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशिष शेलार, पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री शंभूराज देसाई, वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, लेफ्टिनेंट जनरल डी. एस. कुशवाह, पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते सहित तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल वर्मा ने कहा कि कारगिल युद्ध में दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, प्रतिकूल मौसम और दुश्मन की लगातार गोलीबारी के बीच भारतीय सैनिकों ने जिस पराक्रम का परिचय दिया, उसी के कारण राष्ट्र की अखंडता सुरक्षित रही। भारत की सीमाएं केवल हथियारों के बल पर नहीं, बल्कि सैनिकों के साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम से सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शहीद के पीछे एक वीर माता, वीर पत्नी और ऐसा परिवार है जिसने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च त्याग किया है। ऐसे परिवारों के प्रति पूरा देश कृतज्ञ है और उनके सम्मान एवं कल्याण के लिए समाज को निरंतर आगे आना चाहिए।
शहीद जवानों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कारगिल युद्ध में भारतीय जवानों ने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में जो शौर्य दिखाया, वह विश्व के युद्ध इतिहास में अद्वितीय उदाहरण है। भारत का इतिहास जब तक जीवित रहेगा, कारगिल के वीरों का पराक्रम भी अमर रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुश्मन ऊंची पर्वत चोटियों पर मजबूत स्थिति में था, इसके बावजूद भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने अद्वितीय समन्वय और पराक्रम के साथ एक-एक चौकी पर दोबारा कब्जा कर भारत को ऐतिहासिक विजय दिलाई। उन्होंने कैप्टन सौरभ कालिया, कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडे जैसे वीरों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए कहा कि मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर करने वाले इन जवानों का योगदान देश कभी नहीं भूल सकता। फडणवीस ने बताया कि वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री बनने के बाद शहीद जवानों के परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में बड़ी वृद्धि करने का निर्णय लिया गया। शुरुआत में तीन लाख रुपये की सहायता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया और वर्ष 2017 से महाराष्ट्र के प्रत्येक शहीद जवान के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लागू किया गया। उन्होंने कहा कि बलिदान का मूल्य पैसे में नहीं आंका जा सकता, लेकिन महाराष्ट्र सरकार शहीदों के परिवारों के साथ हमेशा मजबूती से खड़ी रहेगी। मुख्यमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब केवल हथियार आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण और निर्यात करने वाला सक्षम राष्ट्र बन रहा है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों की सामरिक क्षमता की भी सराहना की।
वीर माताओं और वीर पत्नियों का त्याग देश नहीं भूलेगा: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल युद्ध में मिली जीत का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय जवानों के शौर्य, त्याग, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों का ऋण देश कभी नहीं चुका सकता। उन्होंने कहा कि शहीद जवानों की वीर माताओं और वीर पत्नियों का त्याग देश का स्वाभिमान है और उनका सम्मान करना पूरे समाज का कर्तव्य है। शिंदे ने बताया कि कारगिल युद्ध की शौर्यगाथा नई पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कारगिल वॉर मेमोरियल में लाइट एंड साउंड शो के लिए 3 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और इसका काम जारी है। उन्होंने कश्मीर और महाराष्ट्र के भावनात्मक संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के हजारों युवाओं ने कश्मीर स्थित सैन्य शिविर में रक्तदान कर जवानों के साथ रक्त का रिश्ता जोड़ा। कुपवाड़ा स्थित 41 राष्ट्रीय राइफल्स के कैंप में छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारूढ़ प्रतिमा का अनावरण भी देशरक्षा का प्रेरणादायी संदेश देता है।
सैनिक परिवारों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध: उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि वर्ष 1999 में कारगिल की कठिन परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अतुलनीय वीरता दिखाकर विजय हासिल की और हिमालय की ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य और राष्ट्रसेवा की गौरवशाली विरासत मिली है। देश की रक्षा के हर अवसर पर महाराष्ट्र ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है और कारगिल युद्ध में भी राज्य के अनेक जवानों ने शौर्य, त्याग और देशभक्ति का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने वीर माताओं और वीर पत्नियों के साहस को नमन करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार पूर्व सैनिकों, वीर पत्नियों, वीर माताओं और दिव्यांग सैनिकों के कल्याण एवं सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक सहयोग जारी रखेगी।
39 वीर सैनिकों और परिवारों का सम्मान
कारगिल विजय दिवस समारोह में भारतीय नौसेना के बैंड की प्रस्तुति के साथ देशभक्ति गीत तथा थलसेना, नौसेना और वायुसेना के दृकश्राव्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। समारोह में महाराष्ट्र के कारगिल युद्ध के शौर्य पुरस्कार विजेताओं, वीर माताओं, वीर पत्नियों और दिव्यांग सैनिकों सहित कुल 39 लोगों को राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया गया।भारतीय नौसेना बैंड को नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही कवि प्रदीप की देशभक्तिपूर्ण रचना के निर्माण और प्रकाशन से जुड़े स्वराधीश डॉ. भरत बलवल्ली का सम्मान किया गया तथा देशभक्ति गीत का औपचारिक लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशिष शेलार ने किया।


